Monday , 7 September 2026
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अलविदा पर्वतपुत्रः सीडीएस जनरल बिपिन रावत, मधुलिका रावत पंचतत्व में विलीन, पूरे देश ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

शोक में डूबे भारत ने नम आंखों से सीडीएस जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को अंतिम विदाई दी। यहां दिल्ली छावनी स्थित बरार स्क्वॉयर अंत्येष्टि स्थल पर जनरल रावत और उनकी पत्नी के पार्थिव शरीर को उनकी बेटियों ने मुखाग्नि दी जिसके बाद दोनों की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हो गईं। आज का दिन भारत के सैन्य इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। जनरल रावत और उनकी पत्नी का अंतिम संस्कार पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के बैंड की धुन के साथ उन्हें 17 तोपों की सलामी दी गई।

 

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उनकी दोनों बेटियों-तारिणी और कृतिका ने अंतिम संस्कार से संबंधित रस्मी अनुष्ठान किए। लाखों लोगों ने टेलीविजन पर इस भावुक कर देने वाले क्षण को देखा। अंत्येष्टि स्थल के पास लोगों का हुजूम मौजूद था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कानून मंत्री किरेन रिजिजू, भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन और भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस भी भारत के पहले सीडीएस के अंतिम संस्कार के समय उपस्थित थे।

अंतिम यात्रा के लिए 2233 फील्ड रेजिमेंट ने रस्मी तोपगाड़ी उपलब्ध कराई। सीडीएस के अंतिम संस्कार में सेना के तीनों अंगों से लगभग 800 सैन्यकर्मी शामिल हुए। कई देशों के सैन्य अधिकारियों ने भी जनरल रावत और उनकी पत्नी को श्रद्धांजलि दी।

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इससे पहले, सीडीएस जनरल रावत की अंतिम यात्रा में उमड़े लोगों के हुजूम ने ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, बिपिन जी का नाम रहेगा’ और ‘जनरल रावत अमर रहें’ जैसे नारे लगाकर अपने प्रिय महान सैनिक को अंतिम विदाई दी।

जनरल रावत की अंतिम यात्रा यहां उनके आधिकारिक आवास से शुरू हुई। रास्ते में हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आम लोग हाथों में तिरंगा लिए फूलों से सजे उस वाहन के साथ दौड़ते नजर आए जिसमें जनरल रावत और उनकी पत्नी के पार्थिव शरीर रखे हुए थे। रास्ते में लोगों ने अपने वाहन रोककर भी देश के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी को नम आंखों से विदाई दी।

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हेलीकॉप्टर हादसे में देश के पहले सीडीएस, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्यकर्मियों के निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है। अब तक 13 में से तीन शवों की ही शिनाख्त हो पाई है। इससे पहले आज सुबह, जनरल रावत के सहायक रहे ब्रिगेडियर एल एस लिद्दर का भी बरार स्क्वेयर में पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

तिरंगे में लिपटे ताबूत में रखे जनरल रावत के अवशेषों को जैसे ही फूलों से सजी तोपगाड़ी में गाड़ी रखा गया, लोगों ने फूलों की पंखुड़ियों की बौछार की और ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘जनरल रावत अमर रहें’ जैसे नारे लगाए।

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Bipin Rawat

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बुधवार को, तमिलनाडु के कुन्नूर के पास एक एमआई17वी5 हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से जनरल रावत (63), उनकी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य सैन्यकर्मियों का निधन हो गया था। भारत के पहले सीडीएस के रूप में, जनरल रावत को सेना के तीनों अंगों के बीच थिएटर कमान स्थापित करने और संयुक्तता लाने का काम सौंपा गया था। जनरल रावत और उनकी पत्नी के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जाने से पहले उनके आधिकारिक आवास में रखा गया था, ताकि लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।

देश की विभिन्न हस्तियों ने जनरल रावत के आधिकारिक आवास 3, कामराज मार्ग पहुंचकर उनके और उनकी पत्नी के अंतिम दर्शन किए तथा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमण, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी, कई केंद्रीय मंत्रियों और राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं, धार्मिक गुरुओं, संतों और कई सांसदों ने जनरल रावत और उनकी पत्नी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, जनरल रावत और उनकी पत्नी की अस्थियों को शनिवार को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। जनरल रावत की छोटी बेटी तारिणी ने कहा, ‘हम कल उनकी अस्थियां लेकर हरिद्वार जाएंगे।’ सीडीएस जनरल रावत के छोटे भाई एवं पूर्व सैन्य अधिकारी विजय रावत ने भी कहा, ‘हम कल उनकी अस्थियों को हरिद्वार ले जाएंगे। हम परिवार के सदस्य उनकी अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने जाएंगे।’ उन्होंने कहा, ‘वेलिंगटन में समारोह में शामिल होने के लिए तमिलनाडु जाने से पहले मैंने उनसे बात की थी। कभी नहीं सोचा था कि किस्मत उन्हें हमसे दूर ले जाएगी।’

इससे पहले, सीडीएस जनरल बिपिन रावत के सैन्य सलाहकार ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर का सैन्य सम्मान के बाद अंतिम संस्कार किया गया। उनकी पत्नी गीतिका ने कहा, ‘यह मेरे लिए बहुत बड़ा नुकसान है, लेकिन मैं एक सैनिक की पत्नी हूं। हमें उन्हें हंसते हुए एक अच्छी विदाई देनी चाहिए। जिंदगी बहुत लंबी है, अब अगर भगवान को ये ही मंजूर है, तो हम इसके साथ ही जिएंगे। वे एक बहुत अच्छे पिता थे, बेटी उन्हें बहुत याद करेगी।’ इसके बाद वे पूरे समय तिरंगे को सीने से लगाकर खड़ी रहीं।

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ब्रिगेडियर लिद्दर की बेटी आशना ने कहा कि वह 17 वर्ष की हैं और वह अपने पिता के साथ बताए इन 17 वर्षों की सभी अच्छी यादों को संजोकर रखेंगी। आशना ने कहा, ‘यह राष्ट्रीय क्षति है। मेरे पिता एक नायक थे।’उन्होंने कहा कि उनके पिता एक खुशमिजाज व्यक्ति थे और उनके सबसे अच्छे मित्र थे।

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जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और ब्रिगेडियर लिद्दर के साथ ही हादसे में लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, विंग कमांडर पीएस चौहान, स्क्वाड्रन लीडर के सिंह, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक, लांस नायक बीएस तेजा, हवलदार सतपाल, जूनियर वारंट अफसर दास और जूनियर वारंट अफसर प्रदीप की भी जान चली गई। हेलीकॉप्टर हादसे में बचे एकमात्र व्यक्ति ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का बेंगलुरु में इलाज चल रहा है।

 

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Hill Mail

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