राज्यपाल ले.जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ और बागेश्वर का दौरा किया। वह पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र धारचूला पहुंचे। उन्होंने वहां जाकर सीमा पर तैनात देश के जवानों से मुलाकात की और उनका हौसला बढाया। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक विषम परिस्थितियों में सीमा पर तैनात रहते हैं और देश के इन जवानों के जोश और जुनून पर हम सबको गर्व है।
राज्यपाल को अपने बीच पाकर सेना के जवान काफी खुश नजर आए। राज्यपाल ने धारचूला स्थित सेना के गेस्ट हाउस में ही रात्रि विश्राम किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी डा.आशीष चैहान, पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह, एसडीएम धारचूला, सीएमओ पिथौरागढ़, सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर राज्यपाल ने कनेक्टिविटी के पहलुओं पर अधिकारियों के साथ बातचीत की।
उन्होंने कैलाश मानसरोवर और छोटा कैलाश की यात्रा मार्गो को लेकर अधिकारियों से चर्चा की और धारचूला क्षेत्र से नेपाल को जोड़ने वाले प्राचीन व्यापारिक मार्ग के बारे में भी जाना।
राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में कई ऐसी जगह हैं जहां पर आकर पर्यटक प्रकृति का आंनद ले सकते हैं। उनमें से एक बागेश्वर भी है। उन्होंने कहा कि भगवान ने उत्तराखंड में ऐसी कई जगह बनाई हैं जो कि हम लोगों को और कहीं पर देखने को नहीं मिल सकती हैं। लोग यहां पर अपने परिवार के साथ आयें और पर्यटन क्षेत्रों का लुत्फ उठायें।
राज्यपाल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बागेश्वर सबसे अलग है। यहां संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों के पास मौका है कि वह यहां आये पर्यटकों को सही तरह से सुविधाएं दें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं का यहां के विकास में विशेष योगदान रहा है। स्वयंसेवी महिलाओं ने कोरोना काल को विश्वास में बदलने का काम किया है। उनकी आंखों में विश्वास है। उन्होंने क्रांति का रास्ता अपना लिया है।
राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि उत्तराखंड एक बार्डर स्टेट है और यह अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ राज्य है ऐसे में सीमांत इलाकों में काफी काम करने की जरूरत है। अब तेजी से बाॅर्डर के इलाकों में सड़के बन रही है। आज भारत मे रोड कनेक्टिवीटी के क्षेत्र में क्रांति हो रही है। जिस प्रकार सड़के बन रही है तो एक बहुत बड़ा बदलाव है।





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