Friday , 4 September 2026
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Forest Fire: भूखे वन्यजीव अब रिहाईशी इलाको में हो रहे दाखिल

Forest Fire: भूखे वन्यजीव अब रिहाईशी इलाको में हो रहे दाखिल
Photo Credit: Ratan Singh Aswal

Forest Fire: भूखे वन्यजीव अब रिहाईशी इलाको में हो रहे दाखिल

पहाड़ो में बढ़ती आग आज इस कदर फैल रही है कि न सिर्फ पेड़,जंगल और जंगली जानवर ही नही बल्कि वन में लगी इस आग से अपनी जान बचाकर भागने वाले जानवरो के खौफ में जीने को मजबूर हो रहे है गांव और गांववासी।

गौरतलब है कि वनाग्नि के चलते अब तक उत्तराखंड में बेकाबू होती वनाग्नि के चलते 231 हेक्टेयर आरक्षित और 21 हेक्टेयर सिविल-वन पंचायत क्षेत्र आग की भेंट चढ़ चुका है। साथ ही साथ राज्यभर में 1871 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। वनाग्नि की 1216 घटनाएं अब तक हो चुकी हैं।

पलायन एक चिंतन के संस्थापक रतन सिंह असवाल ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से जिस विषय को उठाया है, शायद हमारा ध्यान वहां नही जा रहा है जो की चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा “वनाग्नि ने वन्यजीवों को भोजन के लिए मानव बस्तियों में घुसने को मजबूर कर दिया है। हालात यह है कि दुर्लभ प्रजाति की यह हिमालयी लोमड़ी भी पेट की आग बुझाने की खातिर ऐसा व्यवहार कर रही है जैसे कि यह हामरी पालतू हो ।

वन्यजीवों का मानव वसासतों तक डेरा डालना अच्छा संकेत नही। वनाग्नि पर बिना समय गंवाए यदि कोई ठोस एवं प्रभावी कदम नही उठाए गए तो ऐसे दुर्लभ वन्यजीवों का ग्रामीण क्षेत्रों में और दखल बढेगा जिसके कारण दोनो के बीच में आपसी संघर्ष बढ़ने से रोकना जिम्मेदार महकमों के लिए काफी मुश्किल होगा।

यह जानते हुए की सामरिक महत्व के लिए हिमालयी राज्यों से होने वाला मानव पलायन देश हित में नही माना जा सकता है। इसके बावजूद भी अगर Forest_Fire के साथ लगातार बढ़ रहे मानव और वन्यजीवों के संघर्ष को अगर नही रोका गया तो आने वाले समय मे पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीण और ज्यादा पलायन को मजबूर होंगे। जिसका अंजाम भयावह होगा।

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Hill Mail

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