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केदारनाथ के पुनर्निर्माण में हेलीकाॅप्टर की अहम भूमिका

_X4A0007केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य के लिए अब एक नया अध्याय जुड गया है। केदारनाथ में देवभूमि एविएशन द्वारा अंडर स्लंग कारगो विधि से हेलीकाॅप्टर के नीचे सामान लटकाकर पहुंचाया जा रहा है।

पहली बार सिविल क्षेत्र में 11500 फीट की ऊंचाई पर हो रहे पुनर्निर्माण के लिये हेलीकाॅप्टर में नेट की मदद से पांच फेरों में 20 कुन्तल सामग्री धाम तक पहुंचाई गई तथा करीब 300 टन से अधिक निर्माण सामग्री और पहुंचाई जानी है।

केदारनाथ में शीतकाल में भी पुनर्निर्माण का कार्य जोर शोर से चल रहा है। आमतौर पर यहां पर पुनर्निर्माण की सामग्री खच्चरों द्वारा पैदल मार्ग से भेजी जाती थी। इस प्रकार से सामग्री को केदारनाथ तक पहुंचाने में समय भी काफी लगता था तथा भारी व बड़ा सामान ले जाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। ज्यादा भारी सामान होने के कारण इसे खच्चरों से पहुंचाना आसान नही था। इसीलिये अब गुप्तकाशी से हेलीकाॅप्टर द्वारा यह सामान भेजा जा रहा है।

_X4A0004केदारनाथ में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) पुनर्निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। पुनर्निर्माण के लिए सामग्री धाम तक आसानी से पहुंचाने के लिए अंडर स्लंग कारगो विधि अपनाई जा रही है। हिमालय क्षेत्र में इतनी ऊंचाई तक निर्माण सामग्री पहुंचाने का यह पहला मौका है।

हेलीकाॅप्टर से एक चक्कर में अधिकतम 4-5 कुन्तल सामग्री ले जाई जा रही है। इस विधि के तहत हेलीकाप्टर पर एक मजबूत नेट बांध दिया जाता है। नेट में वजन और साइज के हिसाब से निर्माण सामग्री को रखा जाता है। हेलीकाॅप्टर के उडान भरने पर सामग्री से भरा यह नेट हवा में झूलने लगता है।

हेलीकाॅप्टर से पुनर्निर्माण की सामग्री पहुंचाये जाने से अब यहां पर कार्य और तेजी से होगा, इसलिये यह कहना गलत नहीं होगा कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण में हेलीकाॅप्टर की भूमिका भी अहम है।

हिलमेल ब्यूरो

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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