इस शिष्टाचार भेंट के दौरान कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक खेती की महत्ता व आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जैविक खेती पर अधिक से अधिक बल दिया जाये। उन्होंने कहा कि यूनीवर्सिटी द्वारा किये जाने वाले शोध कार्यों का अधिक से अधिक लाभ कृषकों को मिले, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की जा सके।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने संसाधनों का अधिक से अधिक विकसित करे तथा उपलब्ध संसाधनों का सकारात्मक सोच के साथ उपयोग करे ताकि विश्वविद्यालय की आर्थिकीय में भी वृद्धि हो। इसके साथ ही कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कुलपति को शासन के साथ समन्वय बनाने के भी निर्देश दिए।
गौरतलब रहे कि राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने डॉ. मनमोहन सिंह चौहान, निदेशक नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल को गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्व विद्यालय, पंतनगर के कुलपति पद पर नियुक्त किया था। भारत के शीर्ष पशु विज्ञानियों का जब भी जिक्र होता है तो उसमें डॉ मनमोहन सिंह चौहान का नाम जरूर लिया जाता है।
इससे पहले वह डॉ. मनमोहन सिंह चौहान राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल में निदेशक (प्रधान वैज्ञानिक पशु जैव प्रौद्योगिकी) के पद पर कार्यरत थे। गाय, भैंस, याक एवं बकरी से जुड़े अनुसंधान के क्षेत्र में डॉ. चौहान को काफी ख्याति हासिल है। उन्होंने अनुसंधान के 32 वर्षों में पशुधन कार्यकुशलता के लिए अनेक क्षमतावान जनन जैव प्रौद्योगिकी विकसित की हैं।
इस अवसर पर सचिव कृषि बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम भी उपस्थित रहे।


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