Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ हल्द्वानी जेल में गृह दोष दूर करने के लिए 500 रूपये देकर सजा काट रहे हैं लोग, आईजी ने बताया अंधविश्वास
उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरनैनीतालसरोकार

हल्द्वानी जेल में गृह दोष दूर करने के लिए 500 रूपये देकर सजा काट रहे हैं लोग, आईजी ने बताया अंधविश्वास

अब लोग सवाल कर रहे है कि कोई जेल में क्यों रहना चाहेगा इसके पीछे दरअसल ज्यातिष का चक्कर बताया जा रहा है। एक खबर के अनुसार ग्रह-नक्षत्र और कुंडली में यकीन रखने वाले लोग जानते हैं कि अगर आपकी कुंडली में बंधन योग है, तो आपके जेल जाने की संभावना रहती है। इससे बचने के लिए लोग 500 रुपए देकर जेल में रहने जा रहे हैं।

आचार्य डा. रमेश चंद्र जोशी ने बताया कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र के वृहद् जातक, जातक तत्व, उत्तर कालामृत आदि ग्रन्थों में जेल (बंधन) दोष के बारे में विस्तार से लिखा है। उन्होंने कहा कि यदि सभी अशुभ ग्रंथ 2, 5, 9 व 12वें भाव में स्थित हो तो वह मनुष्य अपने जीवन में इन ग्रहों की महादशा व अंतरदशाओं में गिरफ्तार होकर जेल अवश्य जाता है।

उन्होंने आगे बताया कि यदि उस मनुष्य के जन्म, लग्न, मेष, वृष व धनु होता है तो उसे लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है। यदि जन्म लग्न इससे भिन्न हो तो उसे कुछ समय बाद जेल से छुटकारा मिल जाता है।

जेल के डिप्टी अधीक्षक सतीश सुखीजा ने बताया कि हल्द्वानी जेल 1903 में बनाई गई थी। इसके एक हिस्से में अब भी छह स्टाफ क्वॉटर्स वाला हथियार-घर है जो लंबे समय से खाली पड़ा है। अब जेल प्रशासन इसे नई योजना के लिए तैयार कर रहा है।

उन्होंने बताया कि शीर्ष अधिकारियों की तरफ से जेल प्रशासन को लगातार कुछ लोगों के नाम भेजे जाते थे और आदेश दिया जाता था कि उन्हें जेल बैरेक में कुछ समय बिताने दिया जाए। इन लोगों को कैदियों की यूनिफॉर्म दी जाती है और जेल की किचन में बना खाना भी दिया जाता है। इस प्रक्रिया को अब योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

इसके तहत जेल में बने लॉकअप में व्यक्ति को डाला जाएगा जहां उसे अन्य कैदियों की तरह खाना और कम्बल मिलेगा। उसे जेल में दो टाइम का खाना भी मिलेगा।

वैसे हल्द्वानी जेल का अपना एक इतिहास है। यह जेल साल 1903 में बनी थी और 14 दिसंबर 1923 को सुल्ताना डाकू को नजीबाबाद जिले के जंगलों से गिरफ्तार कर हल्द्वानी की जेल में बंद कर दिया था। सुल्ताना के साथ उसके साथी पीताम्बर, नरसिंह, बलदेव और भूरे भी पकड़े गए थे।

नैनीताल की अदालत में सुल्ताना डाकू पर मुकदमा चलाया गया और इस मुकदमे को नैनीताल गन केस कहा गया। केस में सुल्ताना डाकू को फांसी की सजा सुनाई गयी।

हल्द्वानी की जेल में 8 जून 1924 को जब सुल्ताना को फांसी पर लटकाया गया उसे अपने जीवन के तीस साल पूरे करने बाकी थे।

अब मीडिया में आ रही खबरों के बाद आईजी जेल ने हल्द्वानी जेल अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। आईजी के अनुसार इस तरह की बातें अधंविश्वास को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों को इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है। इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...