इस यात्रा में लगभग 1.5 लाख बच्चे और युवा रचनात्मक लेखन, रीडिंग, पेंटिंग, कार्यशालाओं, चर्चाओं और ऐसी अन्य संबंधित गतिविधियों के माध्यम से जुड़ेंगे और हमारे जीवन पर गंगा के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलुओं के बारे में जागरूक होंगे।
गंगा के पवित्र जल ने ऋषियों, दार्शनिकों, लेखकों और कलाकारों को प्रेरित कर भारत के करोड़ों लोगों की सामूहिक मानसिकता में अपनी दिव्य छवि को अमर कर दिया है। यह सचल पुस्तक प्रदर्शनी गंगा से प्रेरित श्रेष्ठ साहित्यिक रचनाओं को कथा वाचन एवं परिचर्चाओं द्वारा जीवंत करने का प्रयास करेगी।

यह गंगा नदी के आसपास रहने वाले लेखकों की साहित्यिक धरोहरों से होकर भी गुजरेगी। इसमें कालीदास, तुलसीदास, प्रेमचंद, रवींद्रनाथ टैगोर, हरिवंश राय बच्चन से लेकर अमीश त्रिपाठी जैसे समकालीन लेखकों के लेखन भी शामिल हैं। इसमें समकालीन लेखन के साथ-साथ गंगा पर शोध कार्यों को भी शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने भी नमामि गंगे के अंतर्गत जन गंगा और ज्ञान गंगा कार्यक्रमों के लिए इस पुस्तक प्रदर्शनी के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई है। गंगा के जल जीवों पर रचनात्मक लेखन को एनबीटी आमंत्रित करेगा और इसे बच्चों के लिए किताबों के रूप में प्रकाशित करेगा।

गंगा पुस्तक प्रदर्शनी ऋषिकेश, हरिद्वार, बिजनौर, मेरठ, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, छपरा, पटना, बेगूसराय, सुल्तानगंज, भागलपुर, साहिबगंज, बहरामपुर, कोलकाता से होकर 22 दिसंबर 2022 को हल्दिया में अपनी यात्रा समाप्त करेगी।
इस पुस्तक प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू में विभिन्न आयु वर्ग हेतु पुस्तकों के अलावा गंगा और भारतीय नदियों और जल निकायों के आसपास विकसित पारिस्थिति की तंत्र पर पुस्तकें प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए उपलब्ध है।
गंगा पुस्तक परिक्रमा किताबों की दुनिया के माध्यम से गंगा की साहित्यिक विरासत से जुड़ने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति के लिए आकर्षण का केंद्र है।


Leave a comment