हाल ही में उत्तराखंड में मिले प्रचंड जनादेश के बाद भाजपा ने लो प्रोफाइल माने जाने वाले त्रिवेंद्र सिंह रावत को सूबे की कमान सौंप दी। 16 साल के बाद इतने भारी बहुमत के साथ सत्ता संभालने वाले रावत के सामने उत्तराखंड को संवारने का प्रयास नई सोच के साथ शुरू करने का दबाव होगा। वह अपने समकक्ष यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ की तरह ताबड़तोड़ फैसले तो नहीं कर रहे हैं लेकिन उनका जोर स्थायित्व के साथ योजनाओं को अमली जामा पहनाने पर है। इस काम में उन्हें साथ मिला है देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का। उत्तराखंड विकास को लेकर स्पष्ट नजरिया रखने वाले डोभाल ने राम नवमी के अवसर पर त्रिवेंद्र रावत को अपने आवास पर आमंत्रित किया।
अजीत डोभाल, त्रिवेंद्र रावत एवं अन्य लोगों ने करीब दो घंटे तक हुई मुलाकात का केंद्र उत्तराखंड ही रहा। सभी ने उत्तराखंड की संभावनाओं और योजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारने के लिए अपने-अपने विचार रखे। जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई उनमें बागवानी, सैन्य पेंशन, सीमा क्षेत्र से घटती आबादी, गढ़वाल क्षेत्र में सैन्य स्कूल, आर्मी मेडिकल काॅलेज, पलायन, सड़क, उत्तराखंड का चीन से लगी सीमा का दिल्ली से नजदीकी शामिल रहे। इसके अलावा जंगली जानवरों से चिंता, एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट इको-संेसिटिव जोन घोषित जैसे मुद्दों पर बात की गई। सभी लोगों का मानना था कि उत्तराखंड के लोगों मंे अपार सम्भावनाएं हैं उनको सही दिशा देने की जरूरत है।
इस मौके पर अजीत डोभाल द्वारा त्रिवेंद्र रावत को हिलरत्न से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड की अनेक जानी मानी हस्तियां भी उपस्थित थी जिनमें सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, राॅ प्रमुख अनिल धस्माना, कोस्ट गार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह, डीजीएमओ अनिल भट्ट, भारतीय जनता पार्टी के मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख अनिल बलूनी, उत्तराखंड के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत, ज्वाइंट सेके्रट्री भारत सरकार आलोक डिमरी, उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस रामास्वामी, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ओम प्रकाश, सीबीएससी के निदेशक एसएस रावत, एडिशनल सके्रटरी रविंदर पंवार, आजतक से मनजीत नेगी, सामाजिक कार्यकर्ता उदित घिल्डियाल आदि शामिल थे।
हिल-मेल ब्यूरो


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