आचार्य बालकृष्ण ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा आयोजित की गई गंगा पुस्तक परिक्रमा की सराहना की और कहा की यह पुस्तक परिक्रमा समाज के लिए प्रेरणादायी है और गंगा के प्रति नई चेतना जागरूक करने में कारगर साबित होगी। उन्होंने कहा की न्यास की यह पहल देशवासियों में गंगा के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
12 अक्टूबर को चंडी घाट से गुज़रते हुए अशोक कुमार, महानिदेशक राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, एनएमसीजी ने राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की सचल पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने पुस्तक प्रदर्शनी का दौरा किया और भारत में गंगा के सांस्कृतिक महत्व और इसके संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किये।

गंगा पुस्तक परिक्रमा के दौरान पुस्तक प्रदर्शनी के अलावा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत द्वारा विभिन्न आयु-वर्ग के बच्चों के लिए गंगा पर आधारित स्टोरी टेलिंग और ड्राइंग कम्पीटीशन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
गंगा पुस्तक प्रदर्शनी हरिद्वार से आगे बढ़ कर बिजनौर, मेरठ, अलीगढ़, फर्रुखाबाद, कानपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, छपरा, पटना, बेगूसराय, सुल्तानगंज, भागलपुर, साहिबगंज, बहरामपुर, कोलकाता से होकर 22 दिसंबर 2022 को हल्दिया में अपनी यात्रा समाप्त करेगी।

इस पुस्तक प्रदर्शनी में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू में विभिन्न आयु वर्ग हेतु पुस्तकों के अलावा गंगा और भारतीय नदियों और जल निकायों के आसपास विकसित पारिस्थितिकी तंत्र पर पुस्तकें प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए उपलब्ध हैं।
हरिद्वार से रवाना होकर यह पुस्तक प्रदर्शनी 14 से 16 अक्टूबर तक बिजनौर में होगी। गंगा पुस्तक परिक्रमा किताबों की दुनिया के माध्यम से गंगा की साहित्यिक विरासत से जुड़ने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति के लिए आकर्षण का केंद्र है।


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