ब्रिगेडियर सर्वेश दत्त डंगवाल, कानाताल
जब गढ़वाल और कुमाऊं उत्तर प्रदेश का अभिन्न भाग था, तब प्रदेश की मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुए, पहाड़ के स्थानीय व्यक्तियों के आर्थिक विकास और उनको व्यवसाय दिलवाने की साकारात्मक सोच से ग्रस्त होकर, मसूरी – चम्बा फल पट्टा योजना को क्रियान्वित किया था।
इस योजना के अधीन वन विभाग, सिविल सोयम और राजस्व विभाग की जमीन को चिन्हित कर, भू-खंडों में आयोजित किया गया और भिन्न वर्ग मीटर के पट्टों को बनाकर स्थानीय लोगों को 99 वर्ष की लीज डीड के तहत आबंटन किया गया।
योजना का आरम्भ 1967/68 में हुआ था और इसके पट्टादाता, जिला टिहरी के जिलाधिकारी बने। लगभग 500 पट्टे आबंटित हुए और उन्हें प्रारम्भ में 10 और उसके उपरान्त 30 वर्ष के अनुबंधन के अन्तर्गत अधिकृत किया।

औसतन, समस्त पट्टों की लीज 2012 को समाप्त हुई और पट्टे के अनुबंध की शर्तों के अनुसार इसका पट्टादाता द्वारा नवीनीकरण होना था। लेकिन, केवल दया सिंघा और उनके पति के वारिसों के पट्टे का, पट्टादाता द्वारा 30 वर्ष के लिए, 2042 तक नवीनीकरण कर दिया गया है।
इसको, शासनादेश/पत्रांक में दिये हुए नियम एवं प्रणाली के अनुसार नहीं किया गया, बल्कि उसका स्पष्ट उल्लंघन करते हुए जिलाधिकारी टिहरी (पट्टादाता) के आदेशानुसार किया गया। इस योजना में सिंघा परिवार के प्रति पट्टादाता द्वारा विशिष्ट पक्षपात किया गया है और बाकी पट्टेदारों के प्रति सौतेला और अनुचित व्यवाहर।
यहां नौकरशाही अपना वास्तविक स्वरूप दिखाते हुए, संविधान और जनता, दोनों की अदालत में गुनाहगार पायी गयी है। इस कारणवश, यह उन समस्त पट्टेदारों की मांग है कि जिस जिलाधिकारी ने यह गुनाह किया है उसके खिलाफ वर्तमान सरकार प्रशासनिक कार्यवाई आदेशित करे और जनता को न्याय दिलाये। साथ ही, जिस विधि के अधीन सिंघा परिवार के फल पट्टे का नवीनीकरण किया गया, ठीक उस विधि के अनुरूप समस्त पट्टेदारों के पट्टों का नवीनीकरण और दाखिला खारिज किया जाये।
लोकतंत्र में, जनता नौकरशाहों से यह अपेक्षा करती है कि, वह समान भाव और सोच के अधीन अपना कार्यभार निभायें और खास और आम की सोच से ऊपर उठकर न्यायपरस्त तरीके से काम करें। हम, सरकार से भी यह उम्मीद रखते हैं कि, जनता के प्रतिनिधि इस बात का संज्ञान लेते हुए लोकतंत्र की मर्यादा को अपना संरक्षण प्रदान करें।


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