भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में अंतिम पग भरते ही 314 नौजवान भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। इनके साथ ही 11 मित्र देशों के 30 विदेशी कैडेट भी पास आउट हुए। मध्य कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने परेड की सलामी ली। इस बार उत्तराखंड से भारतीय सेना को 29 अफसर मिले।
सुबह 8ः55 पर मार्कर्स काल के साथ परेड शुरू हुई, इसके बाद कंपनी सार्जेंट मेजर प्रियांशु त्यागी, नकुल सिंह तोमर, ओंकार, हिमाल श्रीश थापा, असीम आनंद व गौरव चौहान ने ड्रिल स्क्वायर पर अपनी-अपनी जगह ली। नौ बजे एडवास कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते वामशी कृष्णा के नेतृत्व में परेड के लिए पहुंचे। परेड कमांडर पवन कुमार ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली।

कैडेट्स ने शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठे हर शख्स को मंत्रमुग्ध किया। आइएमए बैंड, डोगरा रेजीमेंट बैंड व आर्मी बैंड की धुनों और गुनगुनाती धूप के बीच जांबाजों के एक साथ उठते कदम और गर्व से तने सीने ने दर्शक दीर्घा में ऊर्जा का संचार किया।
इधर, युवा सैन्य अधिकारी अंतिम पग भर रहे थे, तो आसमान से हेलीकॉप्टरों के जरिए उन पर पुष्प वर्षा हो रही थी। परेड के बाद निजाम पवेलियन में आयोजित पीपिंग व ओथ सेरेमनी में भाग लेने के बाद सभी जेंटलमैन कैडेट सेना में अफसर बन गए।

भारतीय सैन्य अकदामी का एतिहासिक चेटवुड भवन सतरंगी प्रकाश से जगमग हुआ। पासिंग आउट परेड की पूर्व संध्या पर आयोजित ‘साउंड एंड लाइट शो’ का आयोजन किया गया था। इस शो के जरिए दिखाया गया कि स्थापना से लेकर वर्तमान तक आइएमए में जेंटलमैन कैडेटों को मिलने वाले सैन्य प्रशिक्षण के साथ ही अकादमी के संरचनात्मक ढांचे में कितना बदलाव हुआ है।
देश में जब भी वीरों की बात होती है तो उनमें उत्तराखंड के जाबाजों का नाम अवश्य आता है। भले ही उत्तराखंड की आबादी और क्षेत्रफल अन्य राज्यों के हिसाब से बहुत छोटा है लेकिन जब देशभक्ति की तुलना की जाती है तो उसमें उत्तराखंड के जाबाज हमेशा आगे रहते हैं और हमेशा देश का नाम रौशन करते रहते हैं। मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करना देवभूमि की युवाओं की पुरानी परंपरा रही है। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में अंतिम पग भरकर उत्तर प्रदेश के 51, हरियाणा के 30 और उत्तराखंड के 29 कैडेट्स सेना में अफसर बने।

उत्तराखंड के युवाओं में देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी है। आईएमए से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर पासआउट होने वाले जेंटलमैन कैडेट्स की संख्या इसकी तस्दीक करती है। जनसंख्या के हिसाब से देखें तो देश को सबसे अधिक जांबाज देने वाले राज्यों में उत्तराखंड शुमार है। एक दशक के दौरान शायद ही ऐसी कोई परेड हो, जिसमें कदमताल करने वाले युवाओं में उत्तराखंडियों की तादाद अधिक न रही हो।
इस पासिंग आउट परेड़ में उत्तर प्रदेश के कैडेट्स की संख्या सबसे अधिक है अगर हम आबादी के हिसाब से देंखे तो उसमें उत्तर प्रदेश देश में सबसे आगे है इसके अलावा हरियाणा और उत्तराखंड के जाबाजों ने भी बाजी मारी है। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार जैसे बड़े राज्य भी उत्तराखंड से बहुत पीछे हैं।
इन्हें मिला अवार्ड
स्वार्ड आफ आनर : पवन कुमार
स्वर्ण पदक : पवन कुमार
रजत पदक : जगजीत सिंह
रजत पदक टीजीसी : अभिषेक शर्मा
कांस्य पदक : प्रापु लिखित
चीफ आफ आर्मी स्टाफ बैनर : जोजिला कंपनी


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