नए साल के दूसरे दिन तमाम लोगों ने हरीश रावत के निवास पर गुनगुनी धूप में पहाड़ी खाने का आनंद उठाया। मंडुवे की रोटी के साथ भांग की चटनी, कंडाली का साग, काले भट्ट की भटवाणी, मूले का थिच्वाणी, गहत की दाल, झंगोरे की खीर जैसे पकवान मेहमानों को परोसे गए साथ ही भगवानपुर व छुटमलपुर का गुड का भी लोगों ने स्वाद चखा।
इस दौरान उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को मोटे अनाजों का वर्ष घोषित किया है, इसमें हमारा मंडुवा कहीं पीछे न रह जाए, इसलिए उन्होंने इस वर्ष को मंडुवा वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने मोटे अनाज के प्रोक्योरमेंट की अनुमति दी थी इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मोटे अनाज (मंडुआ) के 0.096 लाख मीट्रिक टन की प्रोक्योरमेंट की अनुमति मिलने से राज्य में मिलेट (मोटा अनाज) उत्पादन करने वाले किसानों को बडा लाभ मिलेगा। मंडुवा, पौष्टिकता से भरपूर होता है।
मंडुवा के प्रोक्योरमेंट की यह अनुमति फसल वर्ष 2022-23 के लिए दी गई है। मंडुवा का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3574 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। यह राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों के कृषकों की आमदनी बढ़ाने हेतु अभिनव प्रयास सिद्ध हो सकता है।


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