डॉ. एस.एस. संधु ने कहा कि भूस्खलन से किसी प्रकार का जानमाल का नुकसान न हो इसके लिए सबसे पहले परिवारों को शिफ्ट किया जाए और उस बिल्डिंग को प्राथमिकता के आधार पर ध्वस्त किए जाए जो अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। जिन स्थानों पर प्रभावित परिवारों को रखा गया है, उन स्थानों पर उनके रहने खाने की उचित व्यवस्था हो। साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि प्रभावित नागरिकों एवं शासन प्रशासन के मध्य किसी प्रकार का कम्युनिकेशन गैप न हो। उच्चाधिकारी भी लगातार प्रभावित परिवारों के संपर्क रहें, और परिस्थितियों पर नजर बनाए रखें।
डॉ. एस.एस. संधु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भू-धंसाव के कारण मोबाइल नेटवर्क भी प्रभावित हो सकता है। मोबाइल टावर अन्यत्र सुरक्षित स्थान में शिफ्ट कर अथवा नए टावर लगा कर संचार व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को साथ लेकर एक असेसमेंट कमेटी बनाई जाए। प्रतिदिन पूरे क्षेत्र में टीम भेज कर निरीक्षण करवाया जाए कि पिछले 24 घंटे में क्षेत्र में किस प्रकार का और कितना परिवर्तन हुआ हुआ है, जो भवन अधिक प्रभावित हैं उन्हें प्राथमिकता पर ध्वस्त किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जोशीमठ के स्थिर क्षेत्र के लिए ड्रेनेज और सीवेज प्लान पर भी काम शुरू किया जाए। भवनों को ध्वस्त करने में विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाए ताकि ध्वस्तीकरण में कोई अन्य हानि न हो। साथ ही, कंट्रोल रूम को 24 घंटे एक्टिव मोड पर रखा जाए, और आमजन को किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में संपर्क करने हेतु प्रचार प्रसार किया जाए।
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, चमोली के अनुसार जोशीमठ नगर क्षेत्र में कुल 723 भवनों में दरारें आई हैं। सुरक्षा की दृष्टि से 131 परिवारों को अस्थाई रूप से विस्थापित किया गया है। जोशीमठ नगर क्षेत्रान्तर्गत अस्थाई रूप से 1425 क्षमता के 344 राहत शिविर के साथ ही जोशीमठ क्षेत्र से बाहर पीपलकोटी में 2205 क्षमता के 491 कक्षों व हॉलों को चिन्हित किया गया है। जिसमें इन लोगों को रखा जायेगा।
जबकि 53 प्रभावित परिवारों को 5000 रूपये प्रति परिवार की दर से घरेलू सामग्री हेतु धनराशि वितरित की गयी है तथा 10 तीक्ष्ण और पूर्ण क्षतिग्रस्त भवनों के प्रभावितों को प्रति भवन 1.30 लाख की दर से धनराशि वितरित की गई। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को उनकी आवश्यकतानुसार खाधान्न किट एवं कंबल वितरित किये गये हैं, कुल 70 खाद्यान्न किट, 70 कम्बल एवं 570 लीटर दूध प्रभावितों को वितरित किया गया है तथा कुल 80 प्रभावित व्यक्तियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

जोशीमठ में मलारी इन और माउंट व्यू होटल ढहाये जाने थे लेकिन होटल मालिकों के विरोध के बावजूद आज नहीं ढहाये गये। होटल मालिक का कहना था कि पहले होटल का आर्थिक मूल्याकन किया जाना चाहिए उसके बाद ही होटल के ध्वस्तीकरण की इजाजत दी जायेगी। इन होटलों का ध्वस्तीकरण के लिए इनको नोटिस भी नहीं दिया गया। पांच मंजिला होटल मलारी इन में 24 और छह मंजिला होटल माउंट व्यू में 30 के करीब कमरे हैं।
इसी बीच रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने जोशीमठ पहुंचे और उन्होंने वहां पहुंचकर प्रभावितों का हाल जाना। यहां उन्होंने सेना कैंप में भी निरीक्षण किया। अजय भट्ट आर्मी कैंप का निरीक्षण करने के बाद सुनील वार्ड में प्रभावित लोगों से मिले और भरोसा दिलाया कि केन्द्र और राज्य सरकार इस प्राकृतिक आपदा से लोगों को निकालने का काम कर रही है।


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