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उत्तराखंड न्यूज़ऊधम सिंह नगरताज़ा ख़बर

पंतनगर विवि के 34वें दीक्षांत समारोह में एनएसए अजीत डोभाल को राज्यपाल ने प्रदान की डॉक्टरेट ऑफ साइंस की मानद उपाधि

पंतनगर विश्वविद्यालय के 34वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर शोभा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व विद्यालय के लगभग चार सौ प्राध्यापकों ने हिस्सा लिया। इस दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2020-21 व 2021-22 के यूजी के 1269, पीजी के 963 व पीएचडी के 271, कुल 2503 विद्यार्थियों दी उपाधि दी गई। साथ ही 26 स्वर्ण पदक, 22 रजत पदक व 22 कांस्य पदक सहित विभिन्न अवार्ड भी प्रदान किए गए। पिछले साल की तरह इस बार भी छात्राओं ने बाजी मारी है। 70 में से 48 पदक छात्राओं को मिले हैं। वेटरिनरी स्नातक रोशनी व कृषि स्नातक सुरवि को कुलाधिपति स्वर्ण पदक मिला। इस अवसर पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को राज्यपाल ले जनरल गुरमीत सिंह ने डॉक्टरेट ऑफ साइंस की मानद उपाधि प्रदान की।

देश के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय एवं हरित क्रांति की जननी पंतनगर में आयोजित 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह द्वारा 2503 विद्यार्थियों को उपाधि व दीक्षा प्रदान की गयी। इस अवसर पर महामहिम ने कहा कि पी.एचडी. एक अलग ही लेवल है और आज से 275 उपाधि धारक डॉक्टर कहलाएंगे। इस क्षण डिग्री एवं मेडल लेने आए विद्यार्थियों में एक अलग ही उत्साह दिखा जोकि बहुत ही अहम है। आज उत्तराखंड की बेटियों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। यहां तक एक परिवार की दो बहनों ने मेडल हासिल किया है। उन्हांने विद्यार्थियों के माता-पिता और गुरूजनों को हार्दिक बधाई दी और विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता, गुरूजन एवं साथी को न भूलें। दीक्षांत समारोह एक महोत्सव की तरह होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप सपने देखिए और संकल्प लिजिए। पंतनगर हरित क्रांति की जननी रहा है और पुनः बीज, कृषि और औद्यानिकी में क्रांति लाने की आवष्यकता है। हम यदि पूरी जिम्मेदारी से योगदान करे तो हमें कोई विकसित राष्ट्र और विष्वगुरू होने से कोई रोक नहीं सकता। त्रिषुल की तरह तीन बातों को विद्यार्थी धारण करें प्रथम आप स्वयं की योग्यता को पहचाने, द्वितीय सोच, विचार एवं धारणा को बहुत उच्चे स्तर पर लें जाएं और तृतीय स्वयं में अनुषासन को बनाएं रखें। उन्होंने कीर्ति चक्र से सम्मानित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को विज्ञान वारिधि की उपाधि से सम्मानित किये जाने पर बहुत हर्ष व्यक्त किया।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि बॉर्डर में तैनात जवान की तरह ही कृषि उपाधि लेने वाले छात्र योद्धा है। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का ही आयाम है। चीन में खेती कम फिर भी उत्पादकता हमसे अधिक। चीन में 15 प्रतिशत क्षेत्रफल में ही खेती होती है, फिर भी उनका हम से 22 प्रतिशत उत्पादकता अधिक है। एनएसए ने अपने संबोधन में कहा कि अगले 10 वर्ष में भारत को विश्व में खाद्य उत्पादकता के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बनाना होगा। इसके लिए हमारे कृषि योद्धाओं को विशेष योगदान देना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा कि पंत विश्वविद्यालय हमारे राष्ट्र का गौरव है। विश्वविद्यालय देश की सेवा उस समय से कर रहा है, जब देश आजाद हुआ था। जब भारत का विभाजन हुआ तो 22 मिलियन हेक्टर भूमि पाकिस्तान में चली गई, वह बड़ी उपजाऊ भूमि थी। जिससे 35 करोड़ की जनता के लिए अन्न पर्याप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि आजादी के समय देश में 50 मिलियन टन खाद्यान उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 340 मिलियन टन हो गया है।

पंत विश्वविद्यालय की वजह से देश खाद्यान्न में न केवल आत्मनिर्भर हुआ, बल्कि निर्यात भी कर रहा है। इस विश्वविद्यालय का और यहां के शोधकर्ताओं का अहम योगदान है। यहां से 1960 से वैज्ञानिक निकल रहे हैं। जिस वक्त देश आजाद हुआ इस वक्त चीन और भारत का उत्पादन बराबर था। चीन का क्षेत्रफल भारत से अधिक है, लेकिन चीन में सिर्फ 15 प्रतिशत भूमि पर खेती होती है। वर्तमान में भारत में 1.7 मिलियन स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में और चीन ने 1.4 मिलियन स्क्वायर भूमि में खेती होती है, लेकिन चीन का उत्पादन हमारे यहां से तीन गुना ज्यादा होता है। उन्होंने कहा की भारत के कृषि भूमि से कम चीन में होने पर भी वहां उत्पादन अधिक है। हमें अपना प्रोडक्शन बढ़ाना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा की आप सब इसके सैनिक हैं जो उत्पादकता को बढ़ाएंगे।

कृषि मंत्री, उत्तराखंड गणेश जोशी ने उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड का भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा है क्योंकि छात्रों की अपेक्षा छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। देश के 74 कृषि विश्वविद्यालयों में नम्बर एक पर है। देश में कृषि का क्षेत्रफल कम हो रहा है लेकिन उत्पादन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विलुप्त होती पहाड़ी खाद्य प्रजातियों पर शोध करने की आवश्यकता है। आज हम खाद्यान्न के क्षेत्र में विष्व में नम्बर दो पर है। हम 140 करोड़़ की जनसंख्या होने के बावजूद भी 20 से 25 देशां को खाद्यान्न उपलब्ध करा रहे हैं। मोटे अनाजों का अब हमारे भोजन में उपयोग किया जा रहा है। देश में ही नहीं वरन विदेशों में भी मोटे अनाजों की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। केन्द्र सरकार ने मडु़आ का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया है। किसानों की आय दोगुनी करने का सपना पूर्ण किया जाना है।

सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डा. हिमांशु पाठक ने कहा कि दीक्षांत समारोह हमारे जीवन में एक विषेष स्थान रखता है और चिरस्मणीय होता है। वे इस बात से आहलादित थे कि महामहिम प्रत्येक छात्र से उसके माता-पिता के बारे में पूछ रहे थे, जोकि अपने में एक बहुत बड़ा संदेश है। उपाधि धारकों में छात्राओं की अधिक संख्या देखकर लिंग समानता इस विश्वविद्यालय में होने पर गर्व महसूस किया। उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिकों से बहुत अपेक्षाएं और अधिक परिश्रम करना है ताकि प्रधानमंत्री की 2047 में भारत देष के उन्नतशील राष्ट्र से उन्नत राष्ट्र बनाना है और हम इस समय अमृतकाल से गुजर रहे है। उन्होंने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए आह्वान किया कि अपने साथ देश और समाज को उन्नत बनाएं।

कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय हरित क्रांति के रूप में अग्रसर रहकर कृषि, पशुधन, दूध तथा मत्स्य उत्पादन में भी अपना अहम योगदान दे रहा है। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय को विश्व क्यूएस रैंकिंग में 361वां स्थान प्राप्त हुआ तथा कृषि शिक्षा और अनुसंधान में किए गए योगदान के लिए ‘आउटलुक एग्रीटेक समिट एंड स्वराज अवार्ड 2022’ से केंन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय में महामहिम राज्यपाल द्वारा म्यूजियम, जनरल विपिन रावत पर्वतीय शोध शिक्षणालय का उद्घाटन किया गया। कृषि मंत्री द्वारा कृषि महाविद्यालय में वेलनेस एंड मेडिटेशन सेंटर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का भी अनावरण किया गया। उन्होंने कहा कि पहला प्रौद्योगिक सक्षम केन्द्र जो उत्तराखंड एवं आईसीएआर प्रणाली दोनों में पहला टीईसी है, विश्वविद्यालय को मिला है। इस अवसर पर वर्ष 2020-2021 तथा 2021-22 में डिग्री पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि तथा मेडल प्रदान किया गया। प्रत्येक वर्ष के लिए एक सर्वोत्तम स्नातक को कुलाधिपति स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। उपरोक्त दोनों वर्ष के लिए कुल 26 कुलपति स्वर्ण पदक, 22 कुलपति रजत पदक तथा 22 कुलपति कांस्य पदक से विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

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