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पंतनगर विश्वविद्यालय में पशु औषधी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, 14 राज्यों के 300 वैज्ञानिक ले रहें हैं हिस्सा

विश्वविद्यालय के पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय द्वारा डा. रतन सिंह सभागार में अखिल भारतीय पशुचिकित्सा औषधी समिति का वार्षिक सम्मेलन और पालतू पशुओं जंगली जानवरों एवं मुर्गियों में बीमारियों के रोकथाम हेतु शोध में प्रगति तथा नवाचार विषय पर तीन-दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति, डा. मनमोहन सिंह चौहान तथा समिति के अध्यक्ष, डा. डी.एस. नोरियाल, महासचिव, डा. आर. रामप्रभु, अधिष्ठाता पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, डा. एस.पी. सिंह एवं कार्यक्रम सचिव, डा. प्रकाश भट्ट मंचासीन थे। इस संगोष्ठी में 14 विभिन्न राज्यों से लगभग 300 वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं।

मुख्य अतिथि डा. मनमोहन सिंह चौहान ने पशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए उनका समय से टीकाकरण करने पर बल दिया। हाल ही में लम्फी बीमारी के अचानक संक्रमण के कारण बहुत सारे जानवारों की मृत्यु के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि कमजोर एवं लवारिस पशु एक समस्या है क्योंकि उनके द्वारा पालतू पशुओं में कई बीमारियों का संक्रमण हो जाता है। अतः टीकाकरण अवश्य करवा लेना चाहिए। उनके द्वारा पशुचिकित्सा महाविद्यालय में स्टेम सेल पर हो रहे शोध को संज्ञान में लाते हुए डीएनए एवं आरएएन आधारित औषधियों के विकास पर भी सुझाव दिया गया और कहा गया कि मौलिक शोध तथा हर्बल औषधीय एवं हर्बल टीकाकरण पर बल दिये जाने की आवश्यकता है। उनके द्वारा संगोष्ठी प्रांगण में विभिन्न कम्पनियों द्वारा लगाये गये औषधियों के स्टाल का भी अवलोकन किया गया।

डा. डी.एस. नोरियाल ने बताया कि पूर्व में किये गये चिकित्सा शोध में जो उत्कृष्ठ शोध किये गये है उनका आकलन कर ब्लू बूक के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है, जिससे युवा वैज्ञानिक विभिन्न शोधों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि करोना काल में 26 ऑनलाइन वेबीनार आयोजित किये गये थे। डा. आर. रामप्रभु द्वारा समिति की स्थापना एवं समिति द्वारा आयोजित किये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। इस अवसर पर समिति द्वारा पिछले तीन वर्षों में चयनित उत्कृष्ठ वैज्ञानिकों को स्वर्ण पदक तथा समिति की फैलोशिप से भी सम्मानित किया गया।

अधिष्ठाता पशुचिकित्सा डा. एस.पी. सिंह द्वारा समिति के वार्षिक सम्मेलन तथा संगोष्ठी के आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए दूध, मांस एवं अंडे की प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष उत्तराखंड तथा राष्ट्र स्तर पर उपलब्धता एवं अखिल भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा इन पदार्थो की प्रति व्यक्ति आवश्यकता के बारे में प्रकाश डाला गया। विश्वविद्यालय में कडकनाथ मुर्गे की प्रजाति को बढावा दिया जा रहा है। डा. प्रकाश भट्ट द्वारा सभी उपस्थितजनों का स्वागत किया गया तथा सह-सचिव, डा. एस.सी. त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड बायोटेक्नॉलजी परिषद के निदेशक डा. संजय शर्मा, पशुचिकित्सा महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डा. एन.एस. जादौं, विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डा. ए.एस. नैन, निदेशक प्रसार डा. अनिल कुमार शर्मा, निदेशक कृषि व्यवसाय प्रबंधन डा. आर.एस. जादौं, विभागाध्यक्ष, वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी उपस्थित थे। निदेशक संचार डा. जे.पी. जायसवाल ने बताया कि युवा वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों के अन्दर संगोष्ठी के प्रति काफी उत्साह दिखा।

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