इस अवसर पर बोलते हुए, शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि किताबें हमारे जीवन में एक आवश्यक भूमिका निभाती हैं, हमारी सीमाओं का विस्तार करती हैं और हमें एक जगह रहकर भी दुनिया भर की यात्रा कराती हैं। उन्होंने सम्मानित अतिथि देश के रूप में फ्रांस का स्वागत करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस मंच के एक हिस्से के रूप में, न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के सैकड़ों लेखक, प्रकाशक, पुस्तक प्रेमी और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व साहित्य और संस्कृति के इस सामंजस्यपूर्ण समामेलन का हिस्सा होंगे।
शिक्षा राज्य मंत्री ने आगे कहा कि इस साल का विषय है आजादी का अमृत महोत्सव, जो भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है और अमृत काल की ओर हमारी यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। जैसा कि हम स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे कर रहे हैं, नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत ने हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने के लिए इंडिया/75 श्रृंखला भी जारी की है, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान गुमनाम नायकों के विषय के साथ भारत के युवा लेखकों को प्रशिक्षित करने के लिए पीएम-युवा मेंटरशिप योजना भी शुरू की गई थी।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि भारत के जी-20 अध्यक्षता को चिह्नित करने के लिए मेले के हिस्से के रूप में एक समर्पित जी-20 मंडप भी है, जिसमें जी-20 देशों की पुस्तकों की एक विस्तृत श्रृंखला आम लोगों के लिए प्रदर्शित की गई है। उन्होने जानकारी दी कि इस साल मेले में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सफल शुरुआत को प्रदर्शित करने वाला एनईपी मंडप भी है। उन्होंने साथ ही कहा कि व्यवहारिक ज्ञान पर आधारित और छात्र हितैषी इस नीति के क्रियान्वयन के लिए केंद्र, राज्य और देश के क्षेत्रीय संस्थान अभिनव और प्रभावी कदम उठा रहे हैं, जिसे भी प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने जी-20 और विदेशी मंडपों के साथ-साथ बच्चों और भाषा प्रकाशकों के मंडपों के दौरे के बाद हॉल नंबर 5 में मुख्य विषय से जुड़े मंडप का भी उद्घाटन किया। रंजन सिंह ने 75 पीएम युवा प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की – जिन्हें एक प्रतियोगिता के बाद चुना गया था और प्रधानमंत्री की युवा (यंग अपकमिंग वर्सटाइल ऑथर) योजना के तहत स्थापित लेखकों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया था।
एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने अपने सभी अतिथियों और भागीदारों का इस विश्व पुस्तक मेले में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मेला सभी प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों के लिए एक सुनहरा अवसर होगा। उन्होंने किताबों के इस अद्भुत संसार में भाग लेने के लिए और बड़ी संख्या में मेले में आने के लिए सभी क्षेत्रों के पाठकों को आमंत्रित किया। आगे उन्होंने कहा कि नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला लोगों को शिक्षित, सशक्त और सक्षम बनाने का उत्कृष्ठ मंच है।
फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन ने इस अवसर पर कहा कि हम भारत के बारे में एक बात की सराहना करते हैं, वह है इसकी विविधता। इस विविधता के कारण ही फ्रेंच पुस्तकें विभिन्न भारतीय भाषाओं में प्रकाशित हुई हैं। आगे उन्होंने कहा कि मेले में विभिन्न पेशेवर समुदायों के साथ विचारों के आदान-प्रदान से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

आईटीपीओ के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रदीप सिंह खरोला ने भी सभी अतिथियों का स्वागत किया और इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने के लिए सभी को मेले में आने के लिए आमंत्रित किया। पुस्तकें ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए एक प्रभावी उपकरण हैं और आईटीपीओ के लिए इस बड़े पैमाने के आयोजन की मेजबानी करना गर्व की बात है।
फ्रांस के सिंडिकेट नेशनल द लेदिस्यों के अध्यक्ष विन्सेंट मोंटेगने ने अपने वक्तव्य में कहा कि पुस्तक मेला एक सामूहिक साहसिक कार्य है जो हमारी विचार प्रक्रियाओं का पोषण करते हैं। अप्रैल 2022 में पेरिस पुस्तक महोत्सव में अतिथि देश के रूप में भारत की उपस्थिति ने फ्रांस को कहानी, पवित्र ग्रंथ, कविता और थिएटर जैसी विभिन्न विधाओं से रूबरू होने का अवसर प्रदान किया। सुश्री एनी एर्नॉक्स ने कहा कि भारत संरक्षित कलात्मक समृद्धि का देश है और यहाँ मनाया जाने वाला साहित्य दुनिया भर में ज्ञान और जीवन को बदलने के लिए जारी है।
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला – दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में से एक – पुस्तक प्रेमियों को आकर्षित करने के लिए अपने पूरे वैभव के साथ वापस आ गया है। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्वारा आईटीपीओ के सहयोग से एनडीडब्लूबीएफ 2023 का आयोजन 25 फरवरी से 5 मार्च 2023 तक प्रगति मैदान, नई दिल्ली में किया जा रहा है।


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