इस अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि यह किसान मेला सभी के सहयोग से सफल हो पाया है। उन्होंने प्रसार शिक्षा को तीसरे स्तम्भ के रूप में बताते हुए कहा कि विकसित तकनीकों को इसके माध्यम से हितधारकों, उद्यमियों एवं किसानों के मध्य पहुंचाया जाता है। उन्होंने किसान मेला वैज्ञानिकों एवं किसानों के मध्यम एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया जिसके माध्यम से एक स्थान पर एकत्र होकर सभी तकनीकों को किसानों को उपलब्ध कराया जाता है और उनकी समस्याओं को समाधान आसानी से किया जाता है। उन्होंने बताया कि किसान मेले में किसानों ने बढ़़-चढ़ कर प्रतिभाग किया है।
उन्होंने छोटे किसानों को अपना पंजीकरण अपने क्षेत्रों के कृषि विज्ञान केन्द्रों पर अवश्य कराये ताकि उनको तकनीकों की जानकारी मिल सके। किसान मेले में विभिन्न महाविद्यालयों से 10वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों ने भी मेले में लगी प्रदर्शनी का भ्रमण कर तकनीकियों की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों को इस मेले से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि आगे चलकर उनको नये उद्यम, खेती-किसानी आदि करने में सफलता मिले।
डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने मेले में आये हुए छोटी जोत के कृषि यंत्रों की उपयोगिता की सराहना करते हुए कहा कि पहाड़ों पर कृषि को उद्यम के रूप में स्थापित करने में उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने किसान मेले में किसानों हेतु स्टालों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने की अपील की ताकि छोटे किसानों किसान मेले में लगी तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि यह किसान मेला किसानों के सहयोग से पूर्ण हो पाया है और सभी का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

इस कार्यक्रम के प्रारम्भ में चार-दिवसीय 113वें किसान मेले के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के लगभग 18.00 लाख रूपये के बीज, पौधे व कृषि साहित्यों की बिक्री की गयी। उन्होंने बताया कि इस मेले में विभिन्न फर्मों, विश्वविद्यालय एवं अन्य सरकारी संस्थाओं के छोटे-बड़े लगभग 370 स्टाल लगाये गये व लगभग 9 हजार पंजीकृत एवं अपंजीकृत किसानों ने मेले का भ्रमण किया। उन्होंने डॉ. एस.के. बंसल को 25 वर्षों से किसान मेले में महत्वपूर्ण योगदान देने हेतु बधाई दीं।
विश्वविद्यालय में चल रहे चार-दिवसीय किसान मेले के समापन समारोह में आज किसान मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा प्रदर्शित किये गये चयनित स्टालों को पुरस्कृत किया। सर्वोत्तम स्टाल के लिए मैसर्स किसान फर्टिलाइर्जस एजेंसी, काशीपुर तथा सर्वोत्तम प्रदर्शन के लिए मैसर्स सरस्वती एग्रो लाइफ साइंस, पंजाब को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त इस अवसर पर किसान मेले में आयोजित पशु प्रदर्शनी एवं अन्य प्रतियोगिता में विभिन्न स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान किये गये। साथ ही मेले में लगाये गये विभिन्न वर्गों के स्टॉलों को भी उनके प्रदर्शन व बिक्री के आधार पर पुरस्कृत किया गया।
समापन समारोह में डॉ. ए.एस. नैन ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद दिया। डॉ. एस.के. बंसल ने किसान मेले में आए हुए सभी स्टाल धारकों द्वारा किसान मेले को सफल बनाने हेतु सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता एवं निदेशकगण, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य, विद्यार्थी एवं कृषक उपस्थित थे।


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