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प्रधानमंत्री का आपदा जोखिम प्रबंधन में स्थानीय क्षमताओं के निर्माण पर जोर – पीके मिश्रा

आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए राष्ट्रीय मंच (एनपीडीआरआर) का तीसरा सत्र आज नई दिल्ली में संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने समापन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, केंद्रीय गृह सचिव, एनडीएमए के सदस्य और सचिव (प्रभारी), एनडीआरएफ के महानिदेशक, गृह मंत्रालय, एनडीएमए, एनडीआरएफ, एनआईडीएम के वरिष्ठ अधिकारीगण और अन्य हितधारक भी उपस्थित थे।

पीके मिश्रा ने अपने संबोधन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) के सभी प्रासंगिक विषयों को कवर करते हुए 19 पूर्व आयोजनों में देश भर में आयोजित चर्चाओं के विस्तृत दायरे और चर्चाओं की व्यापकता के बारे में प्रसन्नता व्यक्त की। आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने परिकल्पना की थी। प्रधान सचिव ने सत्र की थीम ‘बदलते जलवायु में स्थानीय मजबूती का निर्माण“ के महत्व को रेखांकित किया क्योंकि यह ऐसे समय में आपदा जोखिम प्रबंधन को स्थानीय बनाने की आवश्यकता को पूरा कर रहा है जब आपदा जोखिम न केवल बढ़ रहे हैं बल्कि जोखिमों के नए पैटर्न उभर रहे हैं। पीके मिश्रा ने प्रधानमंत्री के 10-सूत्री एजेंडे का उल्लेख किया जिसमें आपदा जोखिम प्रबंधन में स्थानीय क्षमताओं के निर्माण और पहलों और विशेष रूप से महिलाओं के नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सत्र की कार्यवाही से सीख लेकर प्रधानमंत्री के दस सूत्री एजेंडे और सेंडाई फ्रेमवर्क को लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव ने हितधारकों के लिए दो विषयों के अनुसरण का सुझाव दिया। पहला, राज्य और जिला स्तरों पर आपदा जोखिम प्रबंधन तंत्र को पेशेवर बनाने से संबंधित है और दूसरा, लोगों की प्राथमिकताओं के हिसाब से कार्यक्रम बनाने एवं हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के पहुंचने के बाद होने वाली प्रतिक्रिया की तर्ज पर आपदा तैयारी और आपदा न्यूनीकरण को पेशेवर बनाना होगा। पीके मिश्रा ने कहा कि राज्यों के पास पर्याप्त संसाधन हैं और उन्हें एनडीएमए, एनआईडीएम और एनडीआरएफ द्वारा समन्वय के साथ सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने पेशेवराना कार्यशैली और कार्यक्रम विकास, दोनों के लिए संसाधनों की उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया।

प्रमुख सचिव ने सेंडाई फ्रेमवर्क (जिसकी आठवीं वर्षगांठ एक सप्ताह में होगी) पर धीमी प्रगति को लेकर हितधारकों को सतर्क करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने आगे कहा, “इस 15 वर्षीय फ्रेमवर्क का आधा से ज्यादा समय बीत चुका है और दुनिया सेंडाई लक्ष्यों को हासिल करने से दूर है। हमें एक सुरक्षित देश और सुरक्षित दुनिया बनाने के लिए समुदायों के साथ मिलकर आपदा जोखिम प्रबंधन की ज्यादा प्रभावी, ज्यादा उत्तरदायी व्यवस्था बनाने के लिए खुद को फिर से समर्पित करना चाहिए।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक दिन पहले एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह भी उपस्थित थे। प्रधानमंत्री ने आपदा जोखिम कम करने के क्षेत्र में नवीन विचारों, पहलों, उपकरणों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में 100 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। यह 13 मार्च 2023 तक जनता के लिए खुली रहेगी। डीआरआर के क्षेत्र में विभिन्न पहलों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए यह प्रदर्शनी एक उत्कृष्ट मंच है।

गृह मंत्रालय (एमएचए), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) ने संयुक्त रूप से तीसरा एनपीडीआरआर आयोजित किया। एनपीडीआरआर में चार पूर्ण सत्र, एक मंत्रिस्तरीय सत्र और आठ विषयवार सत्र रखे गए थे। दो दिनों में, 1200 से अधिक विषय विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों और प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर दिए 10 सूत्रीय एजेंडे और सेंडाई फ्रेमवर्क पर आधारित आपदा जोखिम में कमी से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

यह बैठक अमृत काल के दौरान आयोजित की गई। एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र में हुए विचार-विमर्श से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन-2047 के तहत साल 2030 तक भारत को आपदा से निपटने में सशक्त बनाने में सरकार को मदद मिलेगी।

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