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देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की 65वीं जयंती पर द्वितीय जनरल बिपिन रावत स्मृति व्याख्यान

दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर सभागार में हिलमेल फाउंडेशन और प्रभात प्रकाशन की ओर से देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत द्वितीय मैमोरियल लेक्चर का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें रक्षा एवं प्रयर्टन राज्य मंत्री अजय भट्ट और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल अनिल चौहान मुख्य वक्ता होंगे। इस अवसर पर तीनों सेनाओं के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कई गणमान्य लोग शामिल होंगे।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘बदलाव’ लाने की है। उन्होंने पुरानी अवधारणाओं, विचारों और प्रथाओं को चुनौती दी। जिस बदलाव का उन्होंने प्रयास किया, वह केवल ऑपरेशन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सशस्त्र सेनाओं को तैयार रखने मात्र का नहीं था, बल्कि वे राष्ट्र निर्माण के बृहत्तर लक्ष्य की पूर्ति के लिए भी प्रासंगिक था।

Doon's Kanak Chowk will be known as Bipin Rawat

जनरल बिपिन रावत ने अपना पूरा जीवन सशस्त्र सेनाओं और संपूर्ण राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उनकी अकाल मृत्यु के कारण देश ने एक महान् देशभक्त, एक बहादुर जनरल और एक दूरदृष्टा मिलिटरी रणनीतिकार खो दिया। अपनी सशस्त्र सेनाओं को रूपांतरित करने और राष्ट्र-निर्माण के उनके दूरदर्शी स्वप्नों को पूरा करने के हमें प्रयास करने चाहिए और उनके द्वारा सेनाओं में जो भी परिवर्तन वह करना चाहते थे वह हमको करने चाहिए।

उनका रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण में भी एक बड़ा योगदान था। पिछले पांच-छह साल से थलसेना, वायुसेना और नौसेना में स्वदेशी हथियारों को ही तरजीह दी जा रही थी, तो इसका एक बड़ा श्रेय जनरल रावत को जाता है। अगर विदेशी हथियार और सैन्य साजो-सामान खरीद भी रहे थे तो उसे मेक इन इंडिया के तहत देश में ही निर्माण करने की कोशिश रहती थी। यही कारण था कि थलसेना स्वदेशी अर्जुन टैंक लेने को तैयार हुई और वायुसेना ने एलसीएच अटैक हेलीकॉप्टर लेने को हामी भरी थी। जनरल बिपिन रावत रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए हमेशा जाने जाते रहेंगे।

उन्होंने भारतीय सेना को एक नये मुकाम पर ले जाने के लिए अपनी पूरी जिन्दगी लगा दी थी। अब हमको उनके सपनों को साकार करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे यहीं हम सबकी उनके लिए एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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Hill Mail

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