रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार के साहसिक दृष्टिकोण और अटूट संकल्प को श्रेय दिया जिसने सुरक्षित सीमाओं तथा आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग द्वारा समर्थित युद्ध के लिए तैयार सशस्त्र बलों को सुनिश्चित किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता तथा आत्मनिर्भरता को इस सर्वोच्च प्राथमिकता की प्राप्ति का साधन बताते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कुछ कदमों की जानकारी दी, जिनमें सकारात्मक स्वदेशीकरण की अधिसूचना; वित्त वर्ष 2023-24 में घरेलू उपयोग के लिए रक्षा पूंजी खरीद बजट का रिकॉर्ड 75 प्रतिशत निर्धारित करना और स्थानीय कंपनियों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के प्रयास शामिल हैं।
राजनाथ सिंह ने इन निर्णयों से प्राप्त सफलता पर कहा कि पिछले कुछ वर्षों में घरेलू रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। “हम न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं बल्कि अन्य देशों को हथियारों तथा उपकरणों का निर्यात भी कर रहे हैं। 7-8 वर्ष पहले के 900 करोड़ रुपए से बढ़कर रक्षा निर्यात चालू वित्त वर्ष में लगभग 14 हजार करोड़ रुपए का हो गया है। हमारा लक्ष्य 2026 तक 40,000 करोड़ रुपए के रक्षा उपकरणों का निर्यात करना है।” रक्षा मंत्री ने देश में बनाए गए स्टार्ट अप आधारित नवाचार ईको-सिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से 100 से अधिक यूनिकोर्न का निर्माण हुआ है। यह ईको-सिस्टम की सफलता का प्रमाण है।

रक्षा मंत्री ने भारत की कूटनीति को राइजिंग इंडिया का एक और पहलू बताया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जी20 और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की अध्यक्षता इस बात का साक्ष्य है कि विश्व मंच पर भारत का कद निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अनेक अंतर्राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में नरेन्द्र मोदी को सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बताया गया है। अनेक विश्व नेताओं की भी यही राय है। उन्होंने प्रधानमंत्री की सराहना की जिनके कारण भारत की छवि एजेंडा सेटर में बदल गई है और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसे ध्यान से सुना जाता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने आतंकवाद जैसे विषयों पर विश्व का नेतृत्व किया है और इस समस्या को समाप्त करने के लिए समर्थन जुटाने में सफल रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जो देश आतंकवाद को एक औजार के रूप में इस्तेमाल करते हैं वे इस तथ्य से अच्छी तरह परिचित हैं कि भारत कभी भी अनावश्यक रूप से किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है और न ही वह एकता, अखंडता और संप्रभुता को चोट पहुंचाने वाले किसी को छोड़ता है। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक की चर्चा करते हुए कहा कि इस कार्रवाई ने आतंकवादियों की कमर तोड़ दी और विश्व को यह मजबूत संदेश दिया की भारत अपनी धरती पर आतंवाद को खत्म करेगा और आवश्यकता हुई तो विदेशी जमीन पर भी ऐसा करेगा। उन्होंने कहा कि चाहे चीन के साथ गतिरोध हो, चाहे पाकिस्तान के नापाक इरादे हों, हमारी सेनाएं आवश्यकता पड़ने पर मुंहतोड़ जवाब देती रही हैं।
वर्ष 2014 से देश में जारी समग्र विकास की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में देश में देखे जा रहे सामाजिक विकास के बारे में कहा कि यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि समाज के सभी वर्गों के लोगों को चाहे वे किसी भी धर्म, जाति और लिंग के हों, समान अवसर मिलें तथा सभी तरह का कार्यों में उनका उचित प्रतिनिधित्व हो। उन्होंने महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों के बराबर अधिक से अधिक अवसर प्रदान करने के सरकार के संकल्प को दोहराया।
रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के कदम को सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का एक और उदारहण बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश ने फैसले लेने के कारण शांति और प्रगति के नए युग का प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि सरकार पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के विजन को आगे बढ़ा रही है, जिनके नेतृत्व में 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया गया था। रक्षा मंत्री ने कहा कि आज हम अपने यहां बड़ी मिसाइलें, टैंक, हथियार और गोलाबारूद का उत्पादन कर रहे हैं। यह भी एक मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है।


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