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ज्ञान की नगरी काशी में देश के पहले एयरपोर्ट रीडिंग लाउंज का शुभारम्भ

आजादी के अमृतकाल की मजबूत नींव रखने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा विगत कुछ वर्षों में कई दूरदर्शी योजनाओं की शुरुआत की गयी है। - जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से लेकर प्रत्येक पंचायत में एक सामुदायिक पुस्तकालय साथ-साथ बच्चों और किशोरों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना भी सम्मिलित हैं। ‘पढने की आदत को बढ़ावा देने के लिए हवाई अड्डे पर अपनी तरह का एक अनूठा रीडिंग लाउंज, विशषेरूप से वाराणसी शहर में - प्रधानमंत्री के हमारे पढ़े-लिखे समाज के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जो भारत को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट बनाने के लिए एक प्रभावशाली कदम है’।

‘पढने की आदत को बढ़ावा देने के लिए हवाई अड्डे पर अपनी तरह का एक अनूठा रीडिंग लाउंज, विशषे रूप से वाराणसी शहर में – प्रधानमंत्री के हमारे पढ़े-लिखे समाज के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है, जो भारत को विश्व स्तर पर उत्कृष्ट बनाने के लिए एक प्रभावशाली कदम है,’ हवाई अड्डे पर भारत के पहले और दुनिया के सबसे अनोखे रीडिंग लाउंज का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा। यात्रियों के लिए पढ़ने को सुलभ बनाने में नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया और एएआई के प्रयासों की सराहना करते हुए, अवनीश अवस्थी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में एनबीटी-इंडिया और राज्य सरकार द्वारा ऐसे रीडिंग लाउंज खोले जा सकते हैं। यूपी इस पहल में पूरा सहयोग प्रदान करेगा।

उद्घाटन समारोह में मंच पर पदम्श्री मालिनी अवस्थी, आर्यमा सान्याल, हवाईअड्डा निदेशक, वाराणसी एयरपोर्ट, और युवराज मलिक, निदेशक एनबीटी-इंडिया की उपस्थिति रहे। इस कार्यक्रम में सनबीम वाराणसी स्कूल के छात्रों ने उद्घाटन कार्यक्रम के बाद कहानी सुनो प्रश्नोत्तरी और भाषण सत्र में भाग लिया।

‘पढ़ने से बड़ा कोई आनंद नहीं और ज्ञान से बड़ी कोई ताकत नहीं। एक पढ़ा-लिखा समाज भारत को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता हासिल करने में मदद करेगा।’

– नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

 

आजादी के अमृतकाल की मजबूत नींव रखने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा विगत कुछ वर्षों में कई दूरदर्शी योजनाओं की शुरुआत की गयी है – जिनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से लेकर प्रत्येक पंचायत में एक सामुदायिक पुस्तकालय साथ-साथ बच्चों और किशोरों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना भी सम्मिलित हैं।

अरबों आकांक्षाओं के इस देश में, विशेषरूप से जब भारत जी-20 और एससीओ शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है, विचार – विनिमय हेतु ऐसे केंद्रों की आवश्यकता है जो भारत की विश्व गुरु के रूप में पहचान को सुदृढ़ करें।

हवाई अड्डे नए शहर और नई दुनिया के लिए प्रवेश द्वार हैं जहां हम शहर, राज्य, देश एवं संस्कृति के बारे में अपनी धारणायें बनाते हैं। वाराणसी, भारत का सबसे पुराना निरंतर आबाद शहर और सांस्कृतिक राजधानी होने के नात,े हजारों वर्षों से ऋषियों, लेखकों, कवियों और दार्शनिकों को प्रेरित करता रहा है। इसलिए यह प्रासंगिक है कि राष्ट्रीय पस्ुतक न्यास, भारत (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने देश का पहला एयरपोर्ट रीडिंग लाउंज वाराणसी में स्थापित किया है। यह दुनिया में अपनी तरह का ऐसा पहला एयरपोर्ट लाउंज है जहां सभी आगुंतकों और यात्रियों के लिए सर्वोत्तम पस्ुतकें निःशल्ुक उपलब्ध हैं।

यह एयरपोर्ट रीडिंग लाउंज परंपरावादियों के साथ-साथ समकालीन आगुंतकों और यात्रियों दोनों के लिए और इस प्राचीन शहर की रहस्यमय विरासत पर और ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा रखने वालों के लिए काशी का प्रतिबिम्ब है। भारत की संस्कृति, इतिहास, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, स्वास्थ्य और कल्याण के साथ-साथ हिन्दी, फ्रेंच, स्पेनिश, अग्रेंजी और कई अन्य भारतीय भाषाओं में साहित्य के अलावा, रीडिंग लाउंज वाराणसी के साहित्यिक धरोहरों को विशिष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

रीडिंग लाउंज में पीएम-युवा योजना के तहत नवोदित लेखकों की हाल ही में प्रकाशित पस्ुतकों को विशिष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के तीन युवा लेखकों की पुस्तकें शामिल हैं- जिनमें से एक युवा लेखक की उम्र केवल 15 साल है। बड़े अक्षरों, रंगीन चित्र और आयु वर्ग उपयक्ुत रोचक कहानियां सुनिश्चित करती है कि बच्चे हवाई अड्डे पर लंबे समय तक प्रतीक्षा करने के दौरान रचनात्मक रूप से व्यस्त रहें। रीडिंग लाउंज में यात्रियों हेतु छोटी से छोटी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है – बच्चों के लिए कम ऊंचाई वाले स्टूल, वयस्कों हेतु एर्गोनॉमिकल टेबल, सुवर्गीकृत किताबें और एक पुस्तक सहायक। रीडिंग लाउंज में वाराणसी के घाटों पर दिखाई देने वाली पारंपरिक छतरी भी है, जो वास्तव में गंगा के किनारे बैठ ज्ञान प्राप्ति का आभास देती हैं साथ ही एक किताबों वाली नाव, जो नेशनल बकु ट्रस्ट इंडिया द्वारा अस्सी घाट पर चलाये गए बुक्स-ऑन-बोट से प्रेरित है।

रीडिंग लाउंज में क्यूआर कोड के माध्यम से चुनिंदा पुस्तक के अंशों को निःशल्ुक पढ़ने की सुविधा उपलब्ध है। मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट के माध्यम से चुनिंदा ऑडियो पुस्तकों को भी मुफ्त सुन सकते हैं। यह सुविधा विशषेरूप से उन यात्रियों के लिए लाभकारी है जो समय की कमी की वजह से रीडिंग लाउंज में अधिक समय तक रूक नहीं पाते हैं।

जैसा कि प्रसिद्ध लेखिका अन्ना क्विंडलेन कहती हैं, “किताबें विमान, ट्रेन और सड़क हैं। वे गंतव्य हैं, और यात्रा हैं, वेघर हैं।“ तो अपनी अगली काशी यात्रा में राष्ट्रीय पस्ुतक न्यास, भारत के फ्री एयरपोर्ट रीडिंग लाउंज पर आईये और अपने गंतव्य पर पहुंचने से पहले इस अनूठे पड़ाव का अनुभव करें- थोड़ा रुकें, कुछ नए पन्ने पलटें, नए पात्रों से मिलें, भारतीय जीवन-शैली और संस्कृति को पुस्तकों के माध्यम से महसूस करें, विश्व प्रसिद्ध भारतीय साहित्यकारों के बारें में जानें और नयी संस्मतियों के साथ नए सफर पर आगे बढ़ें।

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Hill Mail

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