समूह की महिलाओं के साथ-साथ वह स्थानीय महिलाओं व बच्चों को भी निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कर रही है जिससे महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान हो और बच्चों में शिक्षा के साथ कौशल के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास आसानी से हो सके।

ईशा द्वारा के किसी भी प्रशिक्षण में उनकी बनावट, क्वालिटी और क्वांटिटी ध्यान में रखकर महिलाओं को उनके लाभ और हानि के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है। क्योंकि बाजार में उन्हीं चीजों पर कई लोग काम कर रहे हैं और उन पर क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जाता, क्योंकि वही चीज ऑनलाइन माध्यम से आसानी से कम पैसों में उपलब्ध हो जाती है, इसीलिए क्वालिटी और दम पर वह महिलाओं को विशेष ध्यान देने को कहती है कि कैसे अपने हाथों से बनाई गई वस्तुओं को बेस्ट बनाई जाए।

इस बार दीपावली के अवसर पर ईशा चौहान द्वारा स्थानीय व समूह की महिलाओं को गाय के गोबर से निर्मित दिया, लक्ष्मी चरण, धूपबत्ती, हवन कप, घी बत्ती, कलरफुल व खुशबूदार मोमबत्ती का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वहां स्वरोजगार को अपना कर आजीविका को बढ़ा सके।
ईशा चौहान द्वारा पहले भी समूह की महिलाओं को हर्बल कलर, भीमल, पीरुल, गोबर की डिजाइनर इको फ्रेंडली राखिया का भी निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया है, जो कि खुशबूदार राखियों के नाम से उत्तराखंड में बहुत प्रसिद्ध हुई।


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