इस अवसर पर कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा उपस्थित समस्त अधिष्ठता, निदेशक, वैज्ञानिकों एवं अन्य पदाधिकारियों व कार्मिकों को संबोधित करते हुए केन्द्र पर हुए शोध कार्यों की भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी तथा भविष्य में कृषि उत्पादन को निरंतर बढ़ाते रहने के लिए आवश्यक शोध कार्यों में पूरे उत्साह के साथ लगने हेतु कहा गया।

कुलपति डॉ. चौहान द्वारा इस केन्द्र को एक आदर्श शोध केन्द्र के रूप में विकसित करते हुए किसानों के उपयोग तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप शोध कार्यों की आवश्यकता पर बल दिया गया। साथ ही इस अवसर पर आगामी एग्रीकल्चर साईंस कांग्रेस की तैयारियों के क्रम में विभिन्न शोध केन्द्रों को इसी अनुरूप तैयार करने हेतु निर्देशित किया गया।
कुलपति द्वारा आगामी एग्रीकल्चर साईंस कांग्रेस में विश्वविद्यालय के अधिकतम वैज्ञानिकों एवं शोध छात्रों को अपने शोध पत्र प्रस्तुत करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक डॉ. एस.के. वर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में निदेशक शोध, डॉ. ए.एस. नैन, अधिष्ठाता विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय डॉ. संदीप अरोरा, मुख्य महाप्रबंधक फार्म डॉ. जयंत सिंह एवं विभिन्न फसलों के परियोजना समन्वयक उपस्थित थे।


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