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टास्क मास्टर, जिसने पर्दे के पीछे से निभाई अहम भूमिका

– पीएम मोदी की ऐतिहासिक जीत में उनकी गरीबों केलिए शुरू की गई योजनाओं का बड़ा योगदान रहा। इन सभी योजनाओं की पीएमओ से होती रही मॉनिटरिंग ने यह सुनिश्चित किया कि ये हवाई वादे बनकर न रह जाएं। गरीबों को उनके हक की सुविधाएं मिलें।

मनजीत नेगी, नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के बाद उनके पहले कार्यकाल खत्म होने के मौके पर 24 मई 2019 को साउथ ब्लाक में प्रधानमंत्री कार्यालय में एक समारोह चल रहा था। जिसमें पीएम मोदी समेत प्रधानमंत्री कार्यालय में उनके सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के पहुंचने के बाद मंच पर सबसे पहले एक अधिकारी ने पीएम मोदी का स्वागत किया और अपनी बात कहनी शुरू की।

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री जी आपकी इस विजय यात्रा में छोटे-छोटे पदों के आपके सहयात्री होने का हमे गौरव मिला है। हमने आपसे सीखा है कि विषम परिस्थतियों को कैसे सम किया जा जाता है। साधुओं की, ज्ञानियों की परीक्षा विषम काल में ही होती है। जैसे कपूर में आग लगाने से वह वातावरण को सुगधिंत करता है आग की परवाह नहीं करता है। हम आपको पीएमओ परिवार की तरफ से विश्वास दिलाते हैं कि आने वाले समय में और तत्परता से, और तन्मयता से, और त्वरित गति से आपके आदर्शों का ऐसी निष्ठा से पालन करेंगे कि भारत की उन्नति, गरीबों की और वंचितों की समग्र उन्नति के लिए काम कर सकें। यही हमारा साध्य है, यही हमारा धेय है, यही हमारा जुनून है।’

हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी के सचिव भास्कर खुल्बे की। पांच साल के कार्यकाल के बाद प्रधानमंत्री मोदी की इस विजय यात्रा में उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुमाऊं के लाल भास्कर खुल्बे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम का अहम हिस्सा हैं। भास्कर खुल्बे पश्चिम बंगाल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। लंबे समय तक अलग-अलग पदों पर रहने के बाद 2014 में उन्हें पीएमओ में नियुक्ति मिली। वह इस समय प्रधानमंत्री के सचिव हैं। उन्हें छह महीने का सेवा विस्तार मिला है। वह 31 मार्च, 2019 को सेवानिवृत्त होने वाले थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभालने के बाद बेहद ईमानदार और मेहनती छवि रखने वाले भास्कर को अपनी टीम में चुना। युवाओं को लेकर नीतियां बनाने में उनका अहम योगदान रहता है। उन्हें एक बेहतरीन टास्क मास्टर माना जाता है। भास्कर खुल्बे के बारे में कहा जाता है कि वह जिस जिम्मेदारी को लेते हैं, उसे तब तक फॉलो करते हैं, जब तक वह धरातल पर दिखने न लगे। प्रधानमंत्री कार्यलय से जिन योजनाओं पर नजर रखी जाती है, उनका जिम्मा भास्कर खुल्बे पर ही होता है। यही वजह है कि उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि पीएम द्वारा शुरू की गई सभी योजनाएं धरातल पर नजर आएं। पीएम मोदी की ऐतिहासिक जीत में उनकी गरीबों केलिए शुरू की गई योजनाओं का बड़ा योगदान रहा। इन सभी योजनाओं की पीएमओ से होती रही मॉनिटरिंग ने यह सुनिश्चित किया कि ये हवाई वादे बनकर न रह जाएं। गरीबों को उनके हक की सुविधाएं मिलें।

केदारनाथ पुनर्निर्माण में निभाई अहम् भूमिका

केदारनाथ में पुनर्निर्माण को लेकर भास्कर खुल्बे बहुत अहम भूमिका निभा रहा है और पीएम के दिशानिर्देश में सारे काम की निगरानी करते हैं और हाल में प्रधानमंत्री की केदारनाथ में ध्यान यात्रा को लेकर भी तैयारी भास्कर खुल्बे ने ही की और इसकी पूरी रूपरेखा भी उन्होंने ही बनाई थी। राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार के साथ मिलकर उन्होंने इस पूरी यात्रा को सफल बनाने के अहम भूमिका निभाई।

देवभूमि उत्तराखंड के लिए कहा जाता है। जिस तरह से किसी साधना के लिए कठिन तपस्या की जाती है, उसी तरह से देवभूमि में भी जीवन एक तपस्या है। हालांकि अभी जीवन आसान हो गया है। लेकिन पहले जीवन इतना आसान नहीं था। सुविधाएं कम थी, लेकिन जोश जूनुन इस कदर था कि मंजिलों तक पहुंचना ही जीवन का ध्येय था। आज देश के सभी क्षेत्रों में पहाड़ की कई हस्तियां अपना जौहर दिखा रही हैं। उनमें भास्कर खुल्बे भी एक हैं।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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