Saturday , 5 September 2026
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मंजूरी के बाद भी नहीं बनी सड़क: कंधों पर मरीज ढोने को मजबूर ग्रामीण, सिस्टम पर उठे सवाल

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में विकास की योजनाएं कागज़ों में तो आगे बढ़ती दिखती हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई आज भी बेहद दर्दनाक है। एक ऐसे ही मामले ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है, जहां सड़क निर्माण को मंजूरी मिलने के बावजूद आज तक सड़क नहीं बन सकी। इसका खामियाजा ग्रामीणों और मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि बीमार लोगों को चारपाई या लकड़ी के सहारे पांच किलोमीटर तक कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पांच किलोमीटर का दर्दनाक सफर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जिस सड़क का निर्माण होना था, उसकी फाइलें वर्षों पहले पास हो चुकी थीं। बजट भी स्वीकृत हुआ, लेकिन काम ज़मीन पर शुरू ही नहीं हुआ।
नतीजा यह है कि—
•गर्भवती महिलाओं
•बुजुर्ग मरीजों
•गंभीर रूप से बीमार लोगों को पहाड़ी पगडंडियों से होते हुए अस्पताल ले जाना पड़ता है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जब रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो जाते हैं।
स्वीकृति के बाद भी अधूरी योजना
जानकारी के मुताबिक, सड़क निर्माण को औपचारिक स्वीकृति मिल चुकी थी। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने कई बार आश्वासन भी दिया, लेकिन हर बार मामला फाइलों तक ही सिमट कर रह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि—
•सर्वे हो चुका
•नक्शे तैयार हो चुके
•घोषणाएं कई बार की गईं लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर
सड़क न होने का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, और समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मामलों में:
•मरीज रास्ते में ही बेहोश हो जाते हैं
•प्राथमिक उपचार तक समय पर नहीं मिल पाता
•जान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है
यह स्थिति पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे की कमजोरियों को भी उजागर करती है।
ग्रामीणों का सवाल—विकास आखिर किसके लिए?
ग्रामीणों का साफ सवाल है कि अगर योजनाएं केवल कागज़ों में चलनी हैं, तो फिर विकास का दावा क्यों किया जाता है?
लोगों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे—बस एक ऐसी सड़क चाहते हैं, जिससे मरीजों को इंसानों की तरह अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सड़क निर्माण में तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियां हैं। कुछ जगहों पर भूमि विवाद और वन विभाग की स्वीकृति भी बाधा बनी हुई है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया है कि जल्द ही निर्माण प्रक्रिया को गति दी जाएगी। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां भौगोलिक चुनौतियां पहले से ही ज्यादा हैं, वहां बुनियादी ढांचे की भूमिका और भी अहम हो जाती है। सड़क केवल एक सुविधा नहीं यह जीवन रेखा है, खासकर पहाड़ों में। जब मरीज एंबुलेंस की जगह इंसानों के कंधों पर सफर करने को मजबूर हों, तो समझ लेना चाहिए कि कहीं न कहीं सिस्टम फेल हो चुका है। यह खबर सिर्फ एक गांव की नहीं—बल्कि उस सवाल की है, जो आज भी पहाड़ों में गूंज रहा है: क्या विकास सच में ज़मीन तक पहुंच रहा है?
Written by
Hill Mail

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