Saturday , 5 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ टिहरी-रुद्रप्रयाग में दर्दनाक हादसे: खाइयों में गिरे वाहन, 12 लोगों की मौत से पसरा मातम
उत्तराखंड न्यूज़टिहरीरुद्रप्रयाग

टिहरी-रुद्रप्रयाग में दर्दनाक हादसे: खाइयों में गिरे वाहन, 12 लोगों की मौत से पसरा मातम

नई टिहरी में सबसे बड़ा हादसा उस समय हुआ जब हरिद्वार से अंत्येष्टि में शामिल होकर लौट रहे लोगों का बोलेरो वाहन चंबा-कोटीकॉलोनी मोटर मार्ग पर लगभग 300 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। वाहन में सवार 10 लोगों में से आठ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जिला अस्पताल बौराड़ी में भर्ती कराया गया, जहां एक को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा।
यह हादसा भिलंगना ब्लॉक के नैलचामी क्षेत्र के लोगों के साथ हुआ, जो एक अंतिम संस्कार में शामिल होकर लौट रहे थे। दुर्घटना स्थल पर तीखा मोड़ और गहरी ढलान होने के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी कठिनाई आई। पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद शवों और घायलों को खाई से बाहर निकाला। हादसे में कई परिवारों ने अपने इकलौते बेटों और कमाने वाले सदस्यों को खो दिया।
इस त्रासदी पर नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। वहीं पुष्कर सिंह धामी ने भी शोक व्यक्त करते हुए घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए।
इसी बीच रुद्रप्रयाग जिले में भी एक और दर्दनाक हादसा सामने आया। भीरी-ककोला मार्ग पर एक वाहन अनियंत्रित होकर करीब 250 मीटर गहरी खाई में गिर गया, जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई। पुलिस और एसडीआरएफ टीम ने रातभर अभियान चलाकर शवों को बाहर निकाला।
इसके अलावा टिहरी के प्रतापनगर क्षेत्र में एक अन्य दुर्घटना में भलेश्वर मंदिर के पुजारी मोहन नौटियाल की भी जान चली गई, जब उनकी कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई।
लगातार हो रहे इन हादसों ने पहाड़ी सड़कों की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने सभी घटनाओं की जांच शुरू कर दी है, लेकिन इन हादसों ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक पहाड़ों में इस तरह मासूम जिंदगियां यूं ही हादसों का शिकार होती रहेंगी।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...