तेल संकट के बीच उत्तराखंड की बड़ी तैयारी: इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बूस्ट, नई ईवी पॉलिसी जल्द

तेल संकट के बीच उत्तराखंड की बड़ी तैयारी: इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बूस्ट, नई ईवी पॉलिसी जल्द

उत्तराखंड सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी पॉलिसी लाने जा रही है। बढ़ते वैश्विक तेल संकट, खाड़ी क्षेत्र में तनाव और भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों को देखते हुए सरकार अब पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। 

देहरादून स्थित कैंप कार्यालय में बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवाश्म ईंधन के स्रोत सीमित हैं और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां भविष्य के लिए नई रणनीति अपनाने का संकेत दे रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाने के लिए व्यापक योजना तैयार कर रही है।

 

नई नीति के तहत ई-वाहन खरीदने वाले लोगों को विशेष इंसेंटिव दिए जाएंगे। सरकार सब्सिडी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स में अतिरिक्त छूट देने पर काम कर रही है। साथ ही रियायती ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध कराने की भी तैयारी है, ताकि आम लोग आसानी से इलेक्ट्रिक वाहन खरीद सकें।

 

सरकार केवल वाहनों की खरीद तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राज्य में मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। प्रस्तावित नीति के अनुसार मॉल, होटल, बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थानों पर ई-चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए जा सकते हैं। इसके अलावा पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से फास्ट चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भी ईवी वाहनों का संचालन आसान हो सके।

 

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नई ईवी पॉलिसी केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास का भी बड़ा माध्यम बनेगी। ईवी वाहन बनाने वाली कंपनियों और उद्योगों को उत्तराखंड में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सब्सिडी, भूमि और अन्य सुविधाओं में रियायत देने की योजना बनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

 

उत्तराखंड में वर्तमान समय में 30 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करते हैं तो इससे प्रदूषण में कमी आएगी और तेल आयात पर निर्भरता भी घटेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईवी वाहन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, बल्कि इनके संचालन की लागत कम होने से आम जनता को आर्थिक राहत भी मिलेगी।

 

ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सरकार ने प्रतीकात्मक शुरुआत भी कर दी है। सूचना विभाग में हर शनिवार “नो व्हीकल डे” मनाने का निर्णय लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को ईंधन बचत और वैकल्पिक ऊर्जा के प्रति जागरूक करना है।

 

नई ईवी पॉलिसी को लेकर राज्य में उत्साह का माहौल है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा और हरित परिवहन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

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