कमांद गांव में खूनी गुलदार का कहर: खेत गए बुजुर्ग की दर्दनाक मौत से दहला पौड़ी, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

कमांद गांव में खूनी गुलदार का कहर: खेत गए बुजुर्ग की दर्दनाक मौत से दहला पौड़ी, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

पौड़ी गढ़वाल के कमांद गांव में गुलदार के आतंक ने एक बार फिर पहाड़ों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। शुक्रवार शाम गांव के 60 वर्षीय मोहन उर्फ महेश चंद्र मलासी की गुलदार के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है, जबकि ग्रामीणों में वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

जानकारी के अनुसार मोहन उर्फ महेश चंद्र मलासी रोज की तरह अपने मवेशियों के लिए घास लेने गांव के पास खेतों की ओर गए थे। शाम ढलने के बाद भी जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों को चिंता होने लगी। काफी देर तक इंतजार के बाद परिवार और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। गांव के आसपास जंगल और खेतों में घंटों खोजबीन चलती रही। देर रात उनका शव गांव से कुछ दूरी पर झाड़ियों में क्षत-विक्षत हालत में मिला। शव की हालत देखकर ग्रामीणों में भय और गुस्सा दोनों फैल गया।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और ग्रामीणों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ रही थीं, लेकिन वन विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही पिंजरे लगाए गए।

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह हाल के दिनों में इलाके की सातवीं बड़ी घटना है। लगातार हो रहे हमलों के कारण लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। शाम होते ही गांव की गलियां सूनी हो जाती हैं और लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गुलदार को तुरंत आदमखोर घोषित किया जाए और प्रभावित क्षेत्र में पिंजरे लगाकर उसे पकड़ा जाए। साथ ही रात के समय वन विभाग की नियमित गश्त और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है और टीम लगातार गश्त कर रही है। विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाने की अपील की है। हालांकि ग्रामीण विभाग के इन दावों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक गुलदार को पकड़ा नहीं जाता, तब तक खतरा बना रहेगा।

कमांद गांव की यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है, बल्कि पहाड़ों में तेजी से बढ़ रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष का गंभीर संकेत है। जंगलों में घटता प्राकृतिक आवास और गांवों के आसपास बढ़ती वन्यजीव गतिविधियां अब लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी हैं। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे आगे और भयावह रूप ले सकते हैं।

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