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उत्तराखंड में वनाग्नि का कहर, स्कूल से लेकर मधुमक्खी प्लांट तक राख

उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग की घटनाएं लगातार विकराल रूप लेती जा रही हैं। चकराता, त्यूणी और देहरादून समेत कई क्षेत्रों में जंगल की आग ने भारी तबाही मचाई है। कहीं स्कूल भवन आग की चपेट में आ गए तो कहीं मधुमक्खी पालन केंद्र पूरी तरह जलकर राख हो गए। आग से वन संपदा, कृषि, पशुपालन और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

विकासखंड कालसी के नागथात स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर मंगलवार को जंगल की भीषण आग की चपेट में आ गया। बताया जा रहा है कि आग स्कूल की छुट्टी होने के बाद जंगल से फैलते हुए विद्यालय परिसर तक पहुंच गई। आग लगने से स्कूल के एक कमरे की खिड़की और दरवाजा जलकर राख हो गए। वहीं स्टोर रूम में रखा फर्नीचर, अलमारियां और अन्य जरूरी सामान भी पूरी तरह नष्ट हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन तेज लपटों और हवा के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य केदार सिंह चौहान ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि आग से विद्यालय को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि राहत की बात यह रही कि घटना स्कूल समय समाप्त होने के बाद हुई, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

इधर, चकराता वन प्रभाग की देवघार रेंज में पिछले दो दिनों से भीषण वनाग्नि धधक रही है। इस आग ने सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। डौरा, बौराड़, चौड़ाधार और मझोग के जंगलों में आग लगातार फैल रही है। तेज हवाओं और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के कारण आग बुझाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

वनाग्नि से कई ग्रामीणों की आवासीय छानियां और सेब के बागान भी जलकर नष्ट हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आग ने उनकी वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रशासन और वन विभाग की टीमें लगातार आग बुझाने में जुटी हैं। नायब तहसीलदार राणा ने प्रभावित गांवों में फायर ब्रिगेड भेजी और राजस्व उप निरीक्षक को नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अभी तक क्षतिपूर्ति रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है।

वन क्षेत्राधिकारी शिवानी रावत ने बताया कि आग पहले सिविल क्षेत्र में लगी थी, जो बाद में आरक्षित वन क्षेत्र तक पहुंच गई। विभागीय कर्मचारी, फायर ब्रिगेड और स्थानीय युवा मिलकर आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास कर रहे हैं। वन विभाग ने लोगों से जंगलों में आग न लगाने और सूखी घास-फूस का सावधानीपूर्वक निस्तारण करने की अपील की है।

इसी बीच देहरादून के छिद्दरवाला क्षेत्र में एक मधुमक्खी पालन केंद्र में लगी आग ने भारी नुकसान पहुंचाया। आग लगने से करीब 150 मधुमक्खी बॉक्स जलकर राख हो गए और हजारों मधुमक्खियां जिंदा जल गईं। प्लांट स्थानीय निवासी सुनीता नेगी के खेत में स्थापित था, जबकि इसके संचालक गोविंद पाल किसी काम से सहारनपुर गए हुए थे।

स्थानीय लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक पूरा प्लांट आग की चपेट में आ चुका था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्लांट के पास कुछ लोगों द्वारा थर्माकोल जलाया गया था, जिसकी चिंगारी से आग फैल गई। मधुमक्खी पालक गोविंद पाल ने बताया कि इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उत्तराखंड मौन पालन परिषद के उपाध्यक्ष गिरीश डोभाल ने कहा कि यह आकस्मिक घटना है और प्रभावित व्यवसायी को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों के दौरान आग लगने की 10 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें अधिकतर घटनाएं जंगलों, खाली पड़े प्लॉटों और घास-फूस में आग लगने की रही। देहरादून, सेलाकुई और त्यूणी क्षेत्रों में फायर ब्रिगेड की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पाया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिनव त्यागी ने बताया कि सभी घटनाओं में आधुनिक उपकरणों और पानी की बौछारों की मदद से आग बुझाई गई।

वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं पर सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। साइक्लिंग क्लब के अध्यक्ष हरिसिमरन सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल जल रहे हैं, जिससे जैव विविधता और जल स्रोतों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से वनाग्नि रोकने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने, ड्रोन और उपग्रह निगरानी प्रणाली लागू करने तथा ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर वन मित्र बनाने की मांग की।

लगातार बढ़ती वनाग्नि की घटनाएं अब केवल पर्यावरणीय संकट नहीं रह गई हैं, बल्कि यह लोगों की आजीविका, शिक्षा और वन्य जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। ऐसे में सरकार, प्रशासन और आम जनता को मिलकर इस चुनौती से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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Hill Mail

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