पहाड़ में खेती से बदली तकदीर : कमल गिरी बने युवाओं के लिए प्रेरणा

पहाड़ में खेती से बदली तकदीर : कमल गिरी बने युवाओं के लिए प्रेरणा

उत्तराखंड के पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन के बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने गांव में रहकर ही सफलता की नई मिसाल कायम की है। इन्हीं में एक नाम है कमल गिरी का, जिन्होंने मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक के दम पर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया। कमल गिरी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं, जो रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।

कमल गिरी ने पारंपरिक खेती तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने हॉर्टिकल्चर यानी उद्यानिकी को अपनाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से सेब, कीवी, आड़ू और खुमानी जैसे फलों की खेती शुरू की। पहाड़ की जलवायु और मिट्टी को समझते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया, जिसका परिणाम यह रहा कि उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई और बाजार में उन्हें अच्छा दाम मिला।

बीते सीज़न में कमल गिरी ने सेब और अन्य उत्पादों की बिक्री से लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह उपलब्धि केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी दूरदर्शिता और नवाचार का भी उदाहरण है। उन्होंने खेती को केवल परंपरा नहीं, बल्कि व्यवसाय के रूप में देखा और उसी दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया।

कमल गिरी की खास बात यह है कि उन्होंने अपनी आय के स्रोतों को विविध बनाया। उन्होंने पॉलीहाउस तकनीक को अपनाकर मौसम की मार से फसलों को बचाया और सालभर उत्पादन की संभावना बढ़ाई। इसके साथ ही उन्होंने मधुमक्खी पालन को भी खेती से जोड़ा, जिससे शहद उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय होने लगी। मधुमक्खियों से परागण बेहतर हुआ, जिसका सीधा फायदा फलों की पैदावार में भी देखने को मिला।

इसके अलावा उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत कर खेती में एक नया आयाम जोड़ा। कम लागत और कम जगह में होने वाला मशरूम उत्पादन उनके लिए लाभकारी साबित हुआ। इस तरह कमल गिरी ने यह साबित कर दिया कि यदि खेती को आधुनिक सोच और तकनीक के साथ किया जाए तो यह घाटे का नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य का माध्यम बन सकती है।

कमल गिरी का उद्देश्य केवल अपनी आय बढ़ाना नहीं है। वे चाहते हैं कि पहाड़ों में रहने वाले युवा खेती और स्वरोज़गार के प्रति जागरूक हों और गांव छोड़ने के बजाय अपने क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर तलाशें। वे स्थानीय युवाओं को आधुनिक खेती, बागवानी और स्वरोज़गार के लिए प्रेरित करते हैं। कई युवा उनसे सीख लेकर अब फल उत्पादन और अन्य कृषि गतिविधियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए तो पहाड़ों में भी रोजगार और विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। कमल गिरी ने यह दिखाया है कि आत्मनिर्भरता केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रयास और सकारात्मक सोच से भी हासिल की जा सकती है।

आज कमल गिरी उत्तराखंड के युवाओं के लिए आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुके हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है  गांव में रहकर भी बड़ा सपना देखा जा सकता है और उसे मेहनत से साकार किया जा सकता है। सचमुच, कमल गिरी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।

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