उत्तराखंड में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत शिक्षकों की दूरदराज क्षेत्रों में ड्यूटी लगाए जाने को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूल और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को उनके कार्यस्थल से 50 से 60 किलोमीटर दूर तक ड्यूटी पर भेजा गया है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगातार लगाए जाने से शिक्षक संगठन सरकार और प्रशासन के प्रति असंतोष जता रहे हैं।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनोद थापा ने कहा कि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि लगातार शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली जा रही हैं, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में शिक्षकों की भवन गणना में भी ड्यूटी लगाई गई थी और अब एसआईआर अभियान में दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती कर दी गई है।
विनोद थापा ने कहा कि शिक्षकों को अपने विद्यालयों से कई किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है, जबकि ड्यूटी उनके कार्यस्थल के आसपास लगाई जानी चाहिए थी। तेज गर्मी और लंबी दूरी के कारण शिक्षकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि अवकाश अवधि में शिक्षकों से कार्य लेना आवश्यक है, तो उन्हें अन्य विभागों के कर्मचारियों की तरह एक माह का उपार्जित अवकाश भी दिया जाना चाहिए।
तहसील देहरादून पहुंचे कुछ शिक्षकों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं। हरबर्टपुर के एक शिक्षक ने बताया कि उनकी ड्यूटी मोथरोवाला में लगा दी गई है, जो उनके कार्यस्थल से काफी दूर है। रोजाना इतनी दूरी तय करना कठिन साबित हो रहा है। वहीं कुछ महिला शिक्षिकाओं ने कहा कि उनकी सेवा निवृत्ति में केवल कुछ महीने शेष हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी ड्यूटी एक विधानसभा क्षेत्र से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में लगा दी गई है। इससे उन्हें अतिरिक्त तनाव और परेशानी झेलनी पड़ रही है।
इस मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने भी माना कि ड्यूटी संबंधित क्षेत्र में ही लगाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी जिस बूथ या क्षेत्र से संबंधित है, उसकी ड्यूटी उसी क्षेत्र में लगाना अधिक उचित होता। हालांकि अब कई शिक्षकों को देर से इसकी जानकारी मिल रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
इधर, राज्य में एसआईआर अभियान का प्रशिक्षण 29 मई से शुरू होने जा रहा है। चुनाव आयोग ने इस अभियान को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. पुरुषोत्तम के निर्देशों पर प्रदेशभर में 29 मई से सात जून तक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। राज्यस्तरीय मास्टर ट्रेनर पहले ही तैयार किए जा चुके हैं और अब जिलावार प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान बीएलओ और संबंधित अधिकारियों को गणना प्रपत्र भरने, मतदाता सत्यापन, अपील प्रक्रिया और घर-घर सर्वेक्षण की जानकारी दी जाएगी। आठ जून से बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराएंगे। इन प्रपत्रों को भरकर मतदाताओं को वापस बीएलओ को देना होगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार अब तक करीब 89 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है, जबकि 11 प्रतिशत मतदाताओं का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया है। ऐसे मतदाताओं को अपना रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा ताकि उनका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रह सके। प्रशासन का उद्देश्य है कि कोई भी घर और मतदाता इस प्रक्रिया से छूटने न पाए।
हालांकि चुनाव आयोग एसआईआर अभियान को सफल बनाने में जुटा है, लेकिन शिक्षकों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्थाओं में मानवीय पहलुओं और कर्मचारियों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। अब देखना होगा कि सरकार और निर्वाचन विभाग शिक्षकों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।








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