गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में पीआरडी जवान देहरादून के परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए। यहां से वे रैली के रूप में अपनी मांगों को लेकर विभागीय मंत्री के आवास की ओर कूच करने निकले। जवानों का जुलूस कनक चौक, घंटाघर और बिंदाल पुल होते हुए यमुना कॉलोनी पहुंचा। जैसे ही प्रदर्शनकारी मंत्री आवास के नजदीक पहुंचे, वहां पहले से तैनात पुलिस बल ने भारी बेरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस द्वारा रोके जाने पर जवानों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। इस दौरान कई जवान बेरिकेडिंग पर चढ़ गए और आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे। स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जिसके चलते मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा।
आक्रोशित जवान बाद में सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि लंबे समय से वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
पीआरडी संगठन के जिलाध्यक्ष नवीन बिष्ट ने बताया कि जवान पिछले 72 दिनों से एकता विहार में शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पीआरडी जवानों को वर्षभर नियमित रोजगार नहीं मिल पाता, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। कई जवानों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।
जवानों की प्रमुख मांगों में पूरे साल रोजगार उपलब्ध कराना, महंगाई भत्ता लागू करना और सेवा संबंधी अन्य सुविधाएं प्रदान करना शामिल है। संगठन का कहना है कि पीआरडी जवान विभिन्न सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही हैं।
हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की और उन्हें जिलाधिकारी आशीष चौहान से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया। अधिकारियों के समझाने के बाद जवान शांत हुए और प्रदर्शन समाप्त किया। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन में सुधीर तोमर, विनोद तोमर, किशन रावत, दीपा रावत सहित बड़ी संख्या में पीआरडी जवान मौजूद रहे। अब सभी की निगाहें प्रशासन और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि जवानों की मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।


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