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उत्तराखंड न्यूज़ऊधम सिंह नगरसरोकार

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति हाईकोर्ट में चुनौती, सरकार और अन्य पक्षों से मांगा जवाब

उत्तराखंड के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (जीबीपीयूएटी), पंतनगर के कुलपति डॉ. शिवेंद्र कश्यप की नियुक्ति को लेकर एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कुलपति की नियुक्ति को न्यायालय में चुनौती दी गई है। इस संबंध में पंतनगर निवासी भीष्म सिंह द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह याचिका 15 जून 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट में दाखिल की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि डॉ. शिवेंद्र कश्यप की नियुक्ति विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में कहा गया है कि कुलपति चयन की प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण कानूनी और प्रक्रियागत पहलुओं की अनदेखी की गई, जिससे नियुक्ति की वैधता संदिग्ध हो गई है।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय से मांग की है कि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान में शीर्ष पद पर नियुक्ति पूरी तरह पारदर्शी, नियमसम्मत और योग्यता आधारित होनी चाहिए।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार तथा अन्य संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर की जाएगी।

याचिका में केवल नियुक्ति प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि नियुक्ति से जुड़े कुछ अन्य तथ्यों और परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि चयन प्रक्रिया के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की सत्यता और कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा।

गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय देश के प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। कृषि अनुसंधान, शिक्षा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कुलपति पद को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि इस पद पर नियुक्ति को लेकर उठे विवाद ने शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय समुदाय और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि याचिका में लगाए गए आरोपों पर न्यायालय विस्तृत सुनवाई करता है तो यह मामला केवल पंतनगर विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रियाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं। इससे उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू होने की संभावना है।

फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए नियुक्ति की वैधता या याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। न्यायालय द्वारा सभी पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद ही मामले पर अंतिम निर्णय दिया जाएगा।

गौरतलब है कि पंतनगर विश्वविद्यालय के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब किसी कुलपति की नियुक्ति को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और न्यायालय की टिप्पणियों पर विश्वविद्यालय समुदाय सहित पूरे राज्य की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल सभी संबंधित पक्ष न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं।

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Hill Mail

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