जिला अस्पताल परिसर स्थित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र में लगातार मिल रही अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने शनिवार को औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक और बिक्री व्यवस्था की गहन जांच कराई गई। प्रथम दृष्टया मिली अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी में जन औषधि केंद्र को जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से सील करने के निर्देश दिए।
जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि जन औषधि केंद्र में निर्धारित जेनेरिक दवाओं के स्थान पर अन्य ब्रांडेड दवाएं अधिक कीमत पर बेची जा रही हैं। इन शिकायतों के सत्यापन के लिए डीएम स्वयं अस्पताल पहुंचे और केंद्र का भौतिक निरीक्षण किया। उन्होंने उपलब्ध दवाओं का स्टॉक, खरीद और वितरण से जुड़े अभिलेखों की जांच कराई तथा अधिकारियों को सभी दवाओं का विस्तृत सत्यापन करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र में उपलब्ध जेनेरिक और अन्य ब्रांडेड दवाओं की अलग-अलग सूची तैयार की जाए। साथ ही खरीद, स्टॉक और बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान कर यह सुनिश्चित किया जाए कि केंद्र का संचालन प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जन औषधि केंद्र की वर्तमान संचालन व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि अनियमितताओं को देखते हुए केंद्र के संचालन के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि जन औषधि केंद्र का संचालन पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि आम लोगों को सरकार की मंशा के अनुरूप सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध हो सकें।
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराना है। यदि इस योजना के तहत संचालित केंद्रों में निर्धारित व्यवस्था का पालन नहीं किया जाता है, तो यह सीधे जनता के हितों के साथ खिलवाड़ है। इसलिए जांच पूरी होने तक केंद्र को सील रखा जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के समय मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, ड्रग इंस्पेक्टर, जिला अस्पताल प्रशासन के अधिकारी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
इधर, शनिवार को जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण भी मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दो चिकित्सकों के अवकाश पर रहने और दो डॉक्टरों की अन्य अस्पतालों में ड्यूटी लगाए जाने से कई विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध नहीं हो सकीं। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा या फिर उन्हें करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित बेस अस्पताल का रुख करना पड़ा।
अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. नमन लोहनी की ड्यूटी बेस अस्पताल में थी। वहीं, दो दंत चिकित्सकों में से डॉ. वसंत कुमार मर्तोलिया अवकाश पर थे, जबकि डॉ. जगदीश नेगी की ड्यूटी संयुक्त अस्पताल रानीखेत में लगी हुई थी। इसके अलावा मेडिसिन विशेषज्ञ भी अवकाश पर होने के कारण संबंधित मरीजों को इलाज नहीं मिल सका।
शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में लमगड़ा, भैंसियाछाना, हवालबाग, धौलादेवी और ताकुला विकासखंडों सहित विभिन्न क्षेत्रों से 450 से अधिक मरीज पहुंचे थे। डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण कई मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।
हवालबाग निवासी संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि दांत दर्द की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन संबंधित डॉक्टर मौजूद नहीं थे, जिसके कारण अब दूसरे अस्पताल जाना पड़ रहा है। वहीं अल्मोड़ा निवासी मनोज देवड़ी ने कहा कि त्वचा रोग के उपचार के लिए आए थे, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं मिलने से उन्हें मजबूरन निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ेगा।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (पीएमएस) डॉ. एच.सी. गड़कोटी ने बताया कि अवकाश पर गए चिकित्सक जल्द ही ड्यूटी पर लौट आएंगे, जिसके बाद अस्पताल की सेवाएं सामान्य हो जाएंगी। हालांकि, लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए अस्पताल की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।








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