यूपीसीएल का मानना है कि इन नए विद्युत उपकेंद्रों के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही, बार-बार होने वाली बिजली कटौती, लो-वोल्टेज की समस्या और बढ़ते विद्युत भार से भी राहत मिलेगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक इकाइयों को अधिक भरोसेमंद एवं सुचारु बिजली आपूर्ति उपलब्ध हो सकेगी।
बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए यूपीसीएल के वार्षिक राजस्व बजट (एनुअल रेवेन्यू बजट) और पूंजीगत बजट (कैपिटल बजट) को भी मंजूरी प्रदान की गई। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि स्वीकृत बजट के माध्यम से निगम की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत होगी तथा बिजली वितरण प्रणाली के आधुनिकीकरण की विभिन्न योजनाओं को गति मिलेगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर और आधुनिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधनों पर भी निवेश किया जाएगा।
बैठक के दौरान मानव संसाधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया गया। नव नियुक्त कर्मचारियों को रियायती बिजली दर की सुविधा देने, दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुग्रह राशि उपलब्ध कराने तथा विद्युत दुर्घटनाओं में पशुओं की मृत्यु होने की स्थिति में क्षतिपूर्ति प्रक्रिया को सरल और एकरूप बनाने के लिए नई नीति तैयार करने का फैसला लिया गया। इससे प्रभावित लोगों को राहत मिलने के साथ-साथ मुआवजा प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
इसके अलावा यूपीसीएल को अगले तीन माह के भीतर आगामी पांच वर्षों के लिए विस्तृत रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस योजना के माध्यम से भविष्य में राज्य की बिजली आवश्यकता का आकलन करते हुए उत्पादन, खरीद और वितरण की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
वहीं दूसरी ओर, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) परियोजनाओं के टैरिफ विवाद में यूपीसीएल को झटका दिया है। आयोग ने यूपीसीएल द्वारा दायर विशेष राहत याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुराने बेंचमार्क क्षमता शुल्क ₹3,96,747 प्रति मेगावाट प्रतिमाह के आधार पर परियोजनाओं को लागू नहीं किया जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि यूपीसीएल ने चल रही टेंडर प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की समय पर जानकारी नहीं दी। आयोग के अनुसार बीईएसएस परियोजनाओं का अंतिम टैरिफ प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा और इसी कारण याचिका को निराधार मानते हुए अस्वीकार कर दिया गया।
यूपीसीएल बोर्ड की बैठक में लिए गए ये फैसले राज्य की बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। विशेष रूप से नए विद्युत उपकेंद्रों की स्थापना से दूरस्थ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को भी बेहतर गुणवत्ता की विद्युत आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।


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