उत्तराखंड में सहकारिता आधारित मत्स्य विकास को नई गति मिली है। हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में देशभर में मत्स्य सहकारी समितियों के गठन, उनके सुदृढ़ीकरण और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत दी जा रही सहायता को लेकर प्रश्न उठाया। इस पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लिखित उत्तर में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे “सहकार से समृद्धि” अभियान के तहत देशभर में मत्स्य सहकारिता क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक देशभर में 2,356 नई मत्स्य सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है, जबकि 1,700 मौजूदा समितियों का सुदृढ़ीकरण किया गया है। इन समितियों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के अभिसरण से मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बेहतर अवसंरचना उपलब्ध कराई जा रही है।
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संसद में मिली जानकारी को उत्तराखंड के लिए उत्साहजनक बताते हुए कहा कि राज्य में अब तक 124 नई मत्स्य सहकारी समितियों का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों और पर्वतीय भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड ने सहकारिता आधारित मत्स्य विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनके अनुसार यह राज्य सरकार, केंद्र सरकार और सहकारी संस्थाओं के बेहतर समन्वय का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि यदि पर्वतीय राज्यों की तुलना की जाए तो उत्तराखंड इस क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है। उत्तराखंड में 124 नई समितियों के मुकाबले असम में 89, मणिपुर में 71, जम्मू-कश्मीर में 40, अरुणाचल प्रदेश में 29, मेघालय और नागालैंड में 19-19, हिमाचल प्रदेश में 12 तथा सिक्किम में केवल चार नई मत्स्य सहकारी समितियों का गठन हुआ है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सहकारिता के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र के विकास में उत्तराखंड ने अन्य पर्वतीय राज्यों की तुलना में तेज़ प्रगति दर्ज की है।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि केंद्र सरकार मत्स्य सहकारी समितियों को आधुनिक मत्स्य अवसंरचना विकसित करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। इसके अंतर्गत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर, कोल्ड-चेन नेटवर्क, हैचरी, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य आधुनिक सुविधाओं के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा क्षमता निर्माण, व्यवसायिक विकास, विपणन सहायता और संस्थागत सशक्तीकरण जैसी योजनाओं के माध्यम से मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता आंदोलन आज ग्रामीण भारत में आर्थिक परिवर्तन का मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। “सहकार से समृद्धि” अभियान केवल नई समितियों के गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं, मत्स्य पालकों और सहकारी संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस अभियान से उत्तराखंड सहित पूरे देश में मत्स्य क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहकारिता की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।








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