Thursday , 17 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ नीट-यूजी में स्वतंत्रता सेनानी कोटे में फर्जीवाड़ा, चार अभ्यर्थियों पर मुकदमा; ऑनलाइन रिकॉर्ड से खुलेगा राज
उत्तराखंड न्यूज़पौड़ी गढ़वालसरोकार

नीट-यूजी में स्वतंत्रता सेनानी कोटे में फर्जीवाड़ा, चार अभ्यर्थियों पर मुकदमा; ऑनलाइन रिकॉर्ड से खुलेगा राज

उत्तराखंड में नीट-यूजी के तहत स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में एमबीबीएस दाखिले के लिए कथित फर्जी प्रमाण पत्र इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले में चार अभ्यर्थियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया के डिजिटल रिकॉर्ड पर है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अभ्यर्थियों ने आवेदन करते समय कौन-कौन से दस्तावेज अपलोड किए और प्रमाण पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया।

 

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में एमबीबीएस सीट हासिल करने के लिए चार अभ्यर्थियों की ओर से प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे। जांच और सत्यापन के दौरान इन प्रमाण पत्रों में दर्ज पते गलत पाए गए। इसके अलावा जिन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर प्रमाण पत्र लगाए गए थे, उनके नाम संबंधित सरकारी अभिलेखों में भी नहीं मिले। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने चारों अभ्यर्थियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस के सामने अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि फर्जी प्रमाण पत्र केवल अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए थे या आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया में किसी अन्य स्तर पर भी लापरवाही या अनियमितता हुई। चूंकि नीट-यूजी की काउंसलिंग प्रक्रिया ऑनलाइन होती है, इसलिए आवेदन से लेकर दस्तावेज अपलोड करने और सीट आवंटन तक कई चरणों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है। पुलिस इसी रिकॉर्ड को जांच का अहम आधार मान रही है।

जांच में ऑनलाइन आवेदन की तारीख, अभ्यर्थी की ओर से अपलोड किए गए दस्तावेज, प्रमाण पत्रों की जानकारी और संबंधित पोर्टल पर हुई गतिविधियों को देखा जा सकता है। इसके माध्यम से यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि दस्तावेज किस समय और किस माध्यम से अपलोड किए गए थे। यदि किसी स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन या स्वीकृति की प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो उसकी भी जांच की जाएगी।

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटा विशेष श्रेणी के अंतर्गत आता है। ऐसे में इसके लिए निर्धारित प्रमाण पत्रों और पात्रता संबंधी दस्तावेजों का सही होना महत्वपूर्ण माना जाता है। पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि चारों अभ्यर्थियों ने प्रमाण पत्र कहां से प्राप्त किए और उनके आवेदन में इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस तरह किया गया।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस संबंधित विभागों और सरकारी रिकॉर्ड से भी जानकारी जुटा सकती है। प्रमाण पत्रों में दर्ज स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और पते की वास्तविकता की पुष्टि सरकारी अभिलेखों से की जाएगी। इसके अलावा काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कोई आपत्ति दर्ज हुई थी या नहीं।

फिलहाल पुलिस की जांच का केंद्र चार अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्र और पूरी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया है। डिजिटल ट्रेल से आवेदन की शुरुआत से लेकर सीट मिलने तक की प्रक्रिया का क्रम सामने आने की उम्मीद है। इसी आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और इसमें केवल अभ्यर्थियों की भूमिका थी या अन्य स्तरों पर भी किसी तरह की अनियमितता सामने आती है। मामले में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – August 2026

HillMail Aug 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles