मामला देहरादून निवासी विकेश नेगी की ओर से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है। नेगी ने मंत्री गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। इससे पहले वर्ष 2025 में विशेष न्यायाधीश विजिलेंस/अपर जिला जज देहरादून की अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने निचली अदालत के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। 8 सितंबर 2026 को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। यानी उस समय मामले पर अंतिम निर्णय सुनाया जाना बाकी था। फैसले को सुरक्षित रखने के बाद अदालत की ओर से औपचारिक निर्णय जारी नहीं हुआ था।
इसी बीच 11 सितंबर को मंत्री गणेश जोशी ने एक प्रेस वार्ता में दावा किया था कि उनके खिलाफ विचाराधीन याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। हालांकि, उस समय अदालत की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया में नया बदलाव सामने आया।
अब न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने सुरक्षित रखे गए फैसले को जारी नहीं करने का निर्णय लिया है। अदालत ने हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि संबंधित आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को नई पीठ नामित करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया नई पीठ के गठन पर निर्भर करेगी।
अदालत के आदेश में कहा गया है कि 8 सितंबर को मामले में बहस पूरी होने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा गया था, लेकिन कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण पूर्व पीठ द्वारा निर्णय देना उचित नहीं होगा। इसलिए मामले को दूसरी पीठ के समक्ष रखने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि फिलहाल हाईकोर्ट ने गणेश जोशी से जुड़े इस मामले में न तो याचिका खारिज करने का अंतिम निर्णय सुनाया है और न ही आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। आगे की सुनवाई नई पीठ के समक्ष होगी। इसलिए मामले की कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
मामले की शुरुआत उस याचिका से हुई थी, जिसमें विकेश नेगी ने गणेश जोशी पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और 8 सितंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया।
अब अदालत के ताजा आदेश के बाद पूरा मामला नई पीठ के समक्ष जाएगा। नई पीठ के नामित होने के बाद ही इस आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर आगे की सुनवाई होगी और अदालत मामले से संबंधित अगला निर्णय सुनाएगी। फिलहाल इस मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।


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