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इंजीनियर पिता ने खड़ा किया नौसेना का आधार, बेटे ने संभाली तीन सितारा कमान

भारतीय नौसेना की ताकत केवल समुद्र में तैरते युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमानवाहक पोतों से नहीं बनती, बल्कि उन तटवर्ती ढांचों से भी बनती है जो जहाजों की मरम्मत, रखरखाव और संचालन को संभव बनाते हैं। ऐसे ही एक इंजीनियर थे श्री सनत कुमार नैथानी, जिन्होंने नौसेना के बुनियादी ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके बेटे वाइस एडमिरल संदीप नैथानी ने अपने पिता के जीवन और कार्यों को याद करते हुए यह प्रेरक संस्मरण साझा किया है।

 

15 सितंबर 1936 को देहरादून में जन्मे सनत कुमार नैथानी की जड़ें पौड़ी गढ़वाल के नैथाना गांव से जुड़ी थीं। उन्होंने 1959 में यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद स्ट्रक्चर्स में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और करीब चार वर्ष तक वहीं स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग पढ़ाई। बाद में उन्होंने मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) में सेवाएं शुरू कीं।

नैथानी ने फाउंडेशन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी काम किया। साइक्लिक लोडिंग के तहत bored piles और friction piles से जुड़े उनके शोध को तकनीकी क्षेत्र में पहचान मिली। उनके शोधपत्र इंडियन जियोटेक्निकल जर्नल में प्रकाशित हुए और उनके काम को आगे चलकर ‘नैथानी मेथड’ के नाम से भी जाना गया।

विशाखापत्तनम में नौसैनिक ढांचे के निर्माण में योगदान

1969 में उनकी तैनाती विशाखापत्तनम स्थित डायरेक्टोरेट जनरल नेवल प्रोजेक्ट्स (DGNP) में हुई। उस समय ईस्टर्न फ्लीट के विस्तार के साथ नौसैनिक डॉकयार्ड का विकास हो रहा था। भारतीय और सोवियत इंजीनियरों के साथ काम करते हुए नैथानी ने नौसेना के लिए महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं में योगदान दिया। उन्होंने नेवल डॉकयार्ड के लिए स्लिपवे डिजाइन किया।

1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनका परिवार विशाखापत्तनम में था। बेटे संदीप नैथानी उस समय आठ वर्ष के थे। युद्ध के दौरान ब्लैकआउट और सायरन की यादें उनके मन में आज भी दर्ज हैं। इसी अवधि में सनत कुमार नैथानी को ऑपरेशनल क्षेत्र में उनकी सेवा के लिए ‘पूर्वी स्टार’ प्रदान किया गया था।

1980 में वह दोबारा विशाखापत्तनम लौटे और गारिसन इंजीनियर, ड्राई डॉक के रूप में कार्य किया। बाद में उन्होंने मत्स्य डॉक डिजाइन किया और 1981-82 में सूर्य डॉक के निर्माण की निगरानी की। दिल्ली, मुंबई और गोवा में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम किया। इनमें गोवा का बड़े स्पैन वाला TU-142 हैंगर और चाणक्यपुरी का सभागार शामिल था।

पिता से मिली प्रेरणा, बेटे ने नौसेना में बनाया मुकाम

संदीप नैथानी के अनुसार, उनके बचपन में नौसेना का वातावरण लगातार मौजूद रहा। 1971 के युद्ध, डॉकयार्ड की चर्चाएं और पिता का काम उनके जीवन पर प्रभाव डालते रहे। आगे चलकर उन्होंने भारतीय नौसेना में अधिकारी के रूप में लंबी सेवा की और वाइस एडमिरल के पद तक पहुंचे। उन्होंने डायरेक्टर जनरल नेवल प्रोजेक्ट्स, मुंबई समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी जिम्मेदारियां संभालीं और बाद में नौसेना के चीफ ऑफ मैटेरियल के रूप में भी कार्य किया।

उनके कार्यकाल में नौसेना के सबसे बड़े ड्राई डॉक का कमीशनिंग समारोह हुआ, जिसमें उनके पिता भी मौजूद थे। यह क्षण पिता के दशकों पुराने काम और बेटे की जिम्मेदारी के बीच एक भावनात्मक कड़ी बन गया।

सनत कुमार नैथानी का 14 मई 2023 को 86 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उनके पीछे शोधपत्र, डिजाइन और कई निर्माण परियोजनाओं की विरासत रह गई। वाइस एडमिरल संदीप नैथानी ने अपने पिता को समर्पित संस्मरण में कहा कि एक इंजीनियर की सबसे बड़ी विरासत ऐसा काम है जो उसके जाने के बाद भी लंबे समय तक चुपचाप और मजबूती से समाज और संस्थान की सेवा करता रहे।

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Hill Mail

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