इस वर्ष रावण का पुतला 181 फीट ऊंचा बनाया गया है, जबकि कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले 70-70 फीट ऊंचे होंगे। पिछले वर्ष परेड ग्राउंड में 121 फीट ऊंचे रावण का पुतला लगाया गया था। इस बार आयोजन को और भव्य बनाने के लिए लंका का आकर्षक स्वरूप भी तैयार किया जा रहा है।
आयोजन पर खर्च होंगे करीब 21 लाख रुपये
दशहरा कमेटी के प्रधान संतोख नागपाल के अनुसार, इस बार कार्यक्रम को विशेष बनाने के लिए कई तैयारियां की गई हैं। आयोजन पर लगभग 21 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष यह खर्च करीब 16 लाख रुपये था। पुतलों के आकार के साथ-साथ तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शोभायात्रा के प्रवेश मार्ग में बदलाव
दशहरा समारोह में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी पहुंचते हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों की आवाजाही सुचारू रखने के लिए इस बार शोभायात्रा के प्रवेश मार्ग में बदलाव किया गया है।
शोभायात्रा कालिका मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद रवाना होगी। इसके बाद पलटन बाजार, मोती बाजार और चकराता रोड से होते हुए परेड ग्राउंड पहुंचेगी। इस बार शोभायात्रा को दून क्लब के सामने वाले प्रवेश द्वार के बजाय तिब्बती मार्केट के गेट से मैदान में प्रवेश कराया जाएगा।
मैदान के सभी प्रवेश द्वारों पर पुलिसकर्मियों के साथ दशहरा कमेटी की ओर से बाउंसर भी तैनात किए जाएंगे, ताकि भीड़ को व्यवस्थित रखा जा सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
रिमोट से होगा रावण के पुतले का दहन
इस बार दशहरा आयोजन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाएगा। रावण के पुतले में आठ बम लगाए गए हैं, जिन्हें रिमोट के जरिए विस्फोटित किया जाएगा। आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री, महापौर और विधायक रिमोट का बटन दबाकर इस प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।
आतिशबाजी से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए इको-फ्रेंडली पटाखों के इस्तेमाल की भी बात कही गई है।
दशहरा पर्व के माध्यम से हर साल बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया जाता है। देहरादून में इस बार विशाल रावण के पुतले, भव्य लंका और तकनीक आधारित दहन कार्यक्रम को लेकर लोगों में उत्साह रहने की उम्मीद है।




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