घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों के लिए मां भगवती का यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। मंदिर में आग लगने की खबर मिलते ही ग्रामीणों में चिंता फैल गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए।
सुबह छह बजे ग्रामीणों ने देखा धुआं
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब छह बजे डौला गांव के ग्रामीणों ने मंदिर की ओर से धुआं उठते देखा। इसके बाद उन्होंने तत्काल मंदिर समिति के सदस्यों को इसकी सूचना दी। जब तक ग्रामीण मौके पर एकत्र हुए, तब तक आग पूरे मंदिर में फैल चुकी थी। आग इतनी भीषण थी कि मंदिर को बचाने के प्रयासों के बावजूद पूरी इमारत जलकर नष्ट हो गई।
घटना की सूचना मिलने पर तहसील प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और नुकसान से संबंधित जानकारी जुटाई। प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सोने-चांदी के आभूषण और धार्मिक सामग्री नष्ट
मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामग्री भी आग में जल गई। मंदिर समिति के अध्यक्ष भरत सिंह दानू ने नुकसान का अनुमान करीब चार करोड़ रुपये बताया है। मंदिर के पूरी तरह नष्ट होने से क्षेत्र के लोगों को गहरा आघात पहुंचा है। ग्रामीणों के सामने अब मंदिर के पुनर्निर्माण की चुनौती है।
सीएम धामी ने दिए पुनर्निर्माण के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बदियाकोट स्थित मां भगवती मंदिर में आग लगने की घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने जिलाधिकारी को मंदिर और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने को कहा है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रभावित मंदिर के पुनर्निर्माण को लेकर उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों को आशा है कि प्रशासन की मदद और जनसहयोग से मंदिर को दोबारा स्थापित किया जा सकेगा। फिलहाल घटना से हुए नुकसान का आकलन और आग लगने के कारणों की जांच महत्वपूर्ण है।




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