योजना के तहत देहरादून और हल्द्वानी में कोचिंग केंद्र स्थापित किए गए हैं। देहरादून में गढ़वाल मंडल और हल्द्वानी में कुमाऊं मंडल के अभ्यर्थियों को सुविधा देने पर ध्यान दिया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के दिव्यांग युवाओं को सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की योजना है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलेंगी विशेष सुविधाएं
कोचिंग केंद्रों में दिव्यांग अभ्यर्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए ब्रेल लिपि में अध्ययन सामग्री, स्क्रीन रीडर के अनुकूल डिजिटल कंटेंट और ऑडियो लेक्चर की सुविधा शामिल है। वहीं, केंद्रों में रैंप, लिफ्ट, विशेष शौचालय और व्हीलचेयर के अनुकूल बैठने की व्यवस्था भी की गई है।
दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए मुफ्त आवास और भोजन की सुविधा का प्रावधान है। गैर-आवासीय अभ्यर्थियों को परिवहन भत्ता देने की व्यवस्था भी शामिल है। इसके अतिरिक्त कंप्यूटर लैब, डिजिटल टैबलेट, नियमित मॉक टेस्ट और व्यक्तिगत परामर्श जैसी सुविधाओं के जरिए परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।
अनुभवी अधिकारी और विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन
योजना के अंतर्गत अभ्यर्थियों को विषय विशेषज्ञों के साथ अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों से मार्गदर्शन दिलाने की व्यवस्था की गई है। पूर्व आईएएस, आईपीएस और राज्य सिविल सेवा के अधिकारी परीक्षा की तैयारी तथा साक्षात्कार से संबंधित सुझाव देंगे। भारतीय राजव्यवस्था, इतिहास, अर्थव्यवस्था, भूगोल और समसामयिक घटनाओं जैसे विषयों की तैयारी के लिए अनुभवी शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएंगी। मूक-बधिर अभ्यर्थियों के लिए सांकेतिक भाषा जानने वाले सह-शिक्षकों की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
योजना के लिए अभ्यर्थी का उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना आवश्यक बताया गया है। साथ ही, कम से कम 40 प्रतिशत प्रमाणित दिव्यांगता, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक उत्तीर्ण होने या अंतिम वर्ष में अध्ययनरत होने जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं। परिवार की वार्षिक आय भी सरकार के निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों को स्वावलंबी बनाने और उनके सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने इस योजना को समान अवसर उपलब्ध कराने और दिव्यांग युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।




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