5,895 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर रचा इतिहास
कविता चंद ने तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की 5,895 मीटर ऊंची उहुरू पीक को फतह किया। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत तंजानिया के म्वेका गेट से की। इसके बाद कठिन रास्तों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करते हुए महज 12 घंटे 46 मिनट में शिखर तक पहुंच गईं। चोटी पर तिरंगा फहराने के बाद उन्होंने उसी मार्ग से वापस लौटने का सफर शुरू किया और कुल 22 घंटे 36 मिनट में अपना अभियान पूरा कर लिया।
आमतौर पर माउंट किलिमंजारो की चढ़ाई और वापसी में पांच से नौ दिन तक का समय लगता है। अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, बदलते मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण पर्वतारोहियों को शारीरिक अनुकूलन के लिए पर्याप्त समय देना पड़ता है। ऐसे में इतने कम समय में यह अभियान पूरा करना कविता की असाधारण शारीरिक क्षमता, धैर्य और सहनशक्ति को दर्शाता है।
कठिन प्रशिक्षण और तैयारी से मिली सफलता
इस उपलब्धि के पीछे कविता की महीनों की मेहनत और अनुशासित प्रशिक्षण रहा है। उन्होंने 11 अक्टूबर को आयोजित शिकागो मैराथन में हिस्सा लेने के लिए करीब तीन महीने तक लगातार अभ्यास किया। इस दौरान वह प्रत्येक सप्ताह 70 से 90 किलोमीटर तक दौड़ लगाती थीं। इसके साथ ही सप्ताह में तीन दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करती थीं। शिकागो मैराथन में उन्होंने भारतीय महिलाओं के बीच तीसरा स्थान हासिल किया था।
इसके अलावा कविता ने नेपाल में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल अभियान में भी हिस्सा लिया था। हालांकि वह इस अभियान में शिखर तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचने का अनुभव उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसी अनुभव ने किलिमंजारो अभियान में उनकी मदद की।
सेवन समिट्स अभियान का पांचवां पड़ाव
कविता चंद ने बताया कि माउंट किलिमंजारो उनकी सेवन समिट्स यात्रा का पांचवां पर्वत है। इस अभियान के तहत दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर पहुंचने का लक्ष्य होता है। इससे पहले वह एल्ब्रुस, डेनाली, विंसन और एकानकागुआ जैसी विश्व की प्रमुख चोटियों को फतह कर चुकी हैं।
पर्वतारोहण के साथ-साथ कविता मैराथन की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। वह दुनिया की छह प्रमुख वर्ल्ड मैराथन मेजर में से पांच पूरी कर चुकी हैं। अब उनकी नजर शेष एक मैराथन को पूरा करने पर है।
कविता चंद की यह उपलब्धि उत्तराखंड के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिया है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।




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