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चार धाम यात्रियों के लिए गुड न्यूज, अगले साल बन जाएगा ट्रांजिट कैंप

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

केदारनाथ त्रासदी में आई जलप्रलय में हजारों तीर्थयात्रियों की मौत हो गई थी। इसके बाद सरकार ने यात्रा को सुगम और ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया। अब चारधाम यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों के लिए चंद्रभागा के पास पर्यटन विभाग की जमीन पर ट्रांजिट कैंप-रजिस्ट्रेशन कार्यालय तैयार किया जा रहा है। पर्यटकों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर हो रहे इसे कैंप पर कुल 10 करोड़ का खर्च आएगा। सरकार का कहना है कि कैंप का कार्य अगले साल पूरा कर लिया जाएगा।

साल 2013 की त्रासदी के बाद उत्तराखंड सरकार ने ट्रांजिट हॉस्टल योजना पर काम करना शुरू किया। चंद्रभागा और गोपालनगर के पास 3.70 हेक्टेयर वन भूमि को जनवरी 2019 में पर्यटन विभाग को ट्रांसफर किया गया। हाल में कार्यदायी संस्था बिडकुल ने काम शुरू कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 45 मीटर लंबी और चौड़ी बिल्डिंग निर्माण के लिए खुदाई हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि काम इसी तरह चलता रहा तो जुलाई 2021 तक ट्रांजिट कैंप बनकर तैयार हो जाएगा।

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अभी तीन फ्लोर तक का निर्माण किया जा रहा है लेकिन भविष्य में जरूरत बढ़ी तो इसे ऊपर और बढ़ाया जाएगा। ट्रांजिट कैंप के भूतल में दो मल्टीपल टिकट काउंटर होंगे। इसमें महिला, पुरुष के अलावा सीनियर सिटीजन और विकलांगों के लिए अलग सुविधा होगी। इसी तल में बैंक व एटीएम सुविधा भी उपलब्ध होगी।

पर्यटन विभाग और चारधाम यात्रा से जुड़ा संयुक्त रोटेशन का कार्यालय भी यहां होगा। प्रथम तल में दुकानें लगेंगी। द्वितीय तल में यात्रियों के लिए ठहरने की व्यवस्था होगी। एक समय में 150 से 170 यात्री यहां ठहर सकेंगे। कैंप में चढ़ने और उतरने के लिए लिफ्ट की भी व्यवस्था होगी। दिव्यांगों के लिए रैंप सुविधा भी होगी। यहां चारधाम यात्रा के दौरान बाहर से आने वाले करीब 250 वाहनों को पार्क करने भी सुविधा होगी।

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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