मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोके जाने पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां नाराज हो गईं और सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पुलिस और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच काफी देर तक गहमागहमी भी देखने को मिली। कार्यकत्रियों ने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को लेकर केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन की प्रदेश महामंत्री सुशीला खत्री ने कहा कि कार्यकत्रियां लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग उठा रही हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में वहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाकर 12 हजार रुपये करने का फैसला लिया गया है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार को भी प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में जल्द बढ़ोतरी करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में मानदेय वृद्धि के मुद्दे पर सरकार की ओर से एक कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन ढाई साल से अधिक समय बीतने के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट और उसके निर्णय को लेकर कार्यकत्रियों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है।![]()
कार्यकत्रियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति और मानदेय से जुड़े मुद्दों पर सरकार का रवैया निराशाजनक बना हुआ है। इसी वजह से प्रदेशभर की कार्यकत्रियों को एकजुट होकर सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री संयुक्त संगठन ने साफ किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दिवाली से पहले उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां दिवाली का त्योहार काला दिवस के रूप में मनाएंगी।




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