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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
READ MOREकपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
READ MOREदेहरादून में रणनीतिक चिंतन को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ थिंक टैंक का शुभारंभ किया गया। लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने मंच का औपचारिक उद्घाटन करते हुए ‘भीष्म’ का लोगो और वेबसाइट का अनावरण किया।
READ MOREवर्षों से पिरूल को जंगलों के लिए खतरे के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन कुछ जागरूक और नवाचारी महिलाओं ने इसी समस्या को अवसर में बदला। ये महिलाएं पिरूल से सुंदर टोकरी, सजावटी वस्तुएं, लैम्प शेड और अन्य उपयोगी हस्तशिल्प उत्पाद बना रहे हैं। इससे ये महिलाएं हर महीने ₹30,000 से ₹40,000 तक की आय अर्जित कर रही हैं।
READ MOREबीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों में उनकी प्रशासनिक अक्षमता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भारी नाराजगी बताई जा रही है। बीते एक वर्ष में समिति लगातार विवादों में रही है, जिससे नेतृत्व की विफलता उजागर होती दिखाई देती है।
READ MOREमाधो सिंह भंडारी ने पहाड़ काटकर नहर निर्माण का संकल्प लिया—एक ऐसा कार्य जिसे उस समय लोग असंभव मानते थे। 17वीं शताब्दी में उन्होंने इस नहर का निर्माण करवाया। इस परियोजना के अंतर्गत कठोर चट्टानों को काटकर लगभग 600 मीटर लंबी सुरंग बनाई गई, जो उस युग की अद्भुत इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है। लोककथाओं के अनुसार, देवी को प्रसन्न करने और नहर के सफल निर्माण के लिए उन्होंने अपने पुत्र की बलि दी थी।
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से उठी न्याय की एक आवाज अब देश की राजधानी तक पहुंचने की राह पर है। एक ओर जहां देश के जवान सीमाओं पर तैनात होकर राष्ट्र की सुरक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके परिवार के लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
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कपिल शर्मा ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। पॉलीहाउस के माध्यम से संरक्षित खेती, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत किस्म के बीज और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग से उन्होंने कम लागत में अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया।
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