पूरे उत्तर भारत में प्रचंड लू चल रही है। इससे पहाड़ भी बचे नहीं हैं। उत्तराखंड में भी गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है। इस बीच जंगलों में भड़की आग ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वहां से आती तस्वीरें बेचैन कर रही है। अब लोग बारिश के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।
हादसा उस समय हुआ जब परियोजना की सुरंग में श्रमिक काम कर रहे थे। अचानक सुरंग के भीतर पानी और भारी मात्रा में मलबा आने लगा। देखते ही देखते रास्ते बंद हो गए और श्रमिकों के सामने बाहर निकलने की चुनौती खड़ी हो गई। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया। लगातार बढ़ते पानी और मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
सात श्रमिकों की मौत
प्रशासन के अनुसार हादसे में अब तक सात श्रमिकों की मौत हो चुकी है। प्रारंभिक जानकारी में मृतकों की संख्या छह बताई गई थी, लेकिन शुक्रवार को एक और श्रमिक की मौत की पुष्टि होने के बाद आंकड़ा सात पहुंच गया। हादसे में घायल हुए श्रमिकों को जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया। कुछ घायलों को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में भी रेफर किया गया है।
तीन श्रमिकों की तलाश जारी
सबसे बड़ी चिंता अब उन तीन श्रमिकों को लेकर है, जिनका अभी तक पता नहीं चल पाया है। रेस्क्यू टीमें सुरंग के भीतर पानी कम करने, मलबा हटाने और सुरक्षित रास्ता बनाने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि बचाव अभियान पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि सुरंग के अंदर की स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
मलबे और गहरे पानी के बीच रेस्क्यू टीमों की हर कोशिश उम्मीद जगा रही है। सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभियान के दौरान सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बचावकर्मियों की जान को भी खतरे में न डाला जाए।
घायल श्रमिकों का उपचार
हादसे से बाहर निकाले गए श्रमिकों में कई घायल बताए गए हैं। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक कुछ श्रमिकों की हालत गंभीर थी, जिसके चलते उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया गया। अस्पतालों में डॉक्टरों की टीमें घायलों के उपचार में जुटी हैं।
मुख्यमंत्री ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीपलकोटी पहुंचकर हादसे की स्थिति और बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली और सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रशासन और बचाव एजेंसियों के बीच अभियान को लेकर लगातार समन्वय किया जा रहा है।
यह हादसा एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में निर्माणाधीन सुरंगों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। चमोली जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अचानक भूस्खलन, पानी का दबाव और मलबा बड़ी चुनौती बन सकते हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान तीन लापता श्रमिकों को तलाशने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने पर है। परिजनों की निगाहें रेस्क्यू टीमों पर टिकी हैं और हर गुजरते घंटे के साथ उनकी उम्मीदें बचाव अभियान की सफलता से जुड़ी हुई हैं।








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