उत्तराखंड को हमेशा से वीरों की भूमि कहा जाता है इस भूमि ने देश को अनेक वीर योद्धा दिये हैं जिन्होंने अपने योगदान से देश का नाम रौशन किया है। उनमें से एक नाम कर्नल अजय कोठियाल का भी है। जिन्होंने पहले 29 साल देश की सेवा की और अब उत्तराखंड राज्य की सेवा कर रहे हैं।
कर्नल अजय कोठियाल 7 दिसंबर 1992 में गढ़वाल राइफल की 4वीं बटालियन में सेकेंड लेफ्टिनेंट के पद पर भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अनेक बहादुरी भरे काम किये हैं उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन भी चलाये, जिसमें उन्हें पैर में गोली भी लगी थी। अदम्य साहस के लिए उन्हें कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है। वह 26 अप्रैल 2013 से 26 अप्रैल 2018 तक नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के प्रधानाचार्य भी रहे। उत्तराखंड में साल 2013 में आई विनाशकारी हिमालयन सुनामी के बाद शुरू हुए निर्माण कार्यों और खासकर केदारनाथ पुनर्निर्माण की कहानी कर्नल (रिटा.) अजय कोठियाल के जिक्र के बिना अधूरी है। केदारपुरी जिस दिव्य और भव्य स्वरूप में आज नजर आ रही है, उसका श्रेय कर्नल अजय कोठियाल और उनके निर्देशन में बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में काम करने वाली टीम को जाता है।
29 अगस्त 2018 को कर्नल अजय कोठियाल ने स्वैच्छिक सेवानिवृति ली। कर्नल अजय कोठियाल ने अप्रैल 2021 में उत्तराखंड के सियासी रण में प्रवेश लिया और उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया था। उस समय कर्नल कोठियाल को युवाओं का लोकप्रिय नेता माना जाता था। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गये और कुछ समय बाद भाजपा ने उन्हें अपना प्रवक्ता बनाया और अब धामी सरकार ने उन्हें उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार समिति का अध्यक्ष बनाया है।
उन्होंने यूथ फाउंडेशन नामक संस्था की स्थापना की जिसके माध्यम से गरीब परिवार के बच्चों को सेना और अर्द्धसैनिक बलों में भेजने का प्रशिक्षण दिया जाता है और उनमें से कई बच्चे आज भारतीय सेना और अर्द्ध सैनिक बल का हिस्सा बने हुए है। कर्नल कोठियाल की प्रेरणा से चल रहा यूथ फाउंडेशन अब एक मिशन बन चुका है। वह युवक-युवतियों को सेना, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस बलों में जाने के लिए तैयार करते हैं। इतने बड़े अभियान को वह निःशुल्क चलाते हैं। हर चुनौती का सामना शांति और सलीके से करने का हुनर उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। चाहे वह सैन्य मोर्चे पर दुश्मनों के कुटिल इरादों को नाकाम करना हो या फिर आपदा पीड़ित उत्तराखंड में राहत और पुनर्वास का काम। यही वजह है कि राज्य सरकार ने अब उन्हें एक नई जिम्मेदारी सौंपी है।
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