Home उत्तराखंड न्यूज़ हाथियों की बढ़ती हलचल, पर वन विभाग नाकाम, मासूम की मौत से मचा आक्रोश
उत्तराखंड न्यूज़एक्सक्लूसिवताज़ा ख़बरदेहरादूनस्पेशल

हाथियों की बढ़ती हलचल, पर वन विभाग नाकाम, मासूम की मौत से मचा आक्रोश

ऋषिकेश में पिछले कुछ दिनों से हाथियों की लगातार आवाजाही के बीच वन विभाग ने हवाई निगरानी और ड्रोन से मॉनिटरिंग का दावा तो किया, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट रही। एक मासूम बच्चे की जान हाथी के हमले में चली गई। ग्रामीण क्षेत्रों में डर और गुस्सा बढ़ रहा है क्योंकि ड्रोन से निगरानी के दावे सिर्फ कागज़ों में ही साबित हो रहे हैं।

पिछले कई दिनों से रायवाला, डोईवाला और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की लगातार आवाजाही स्थानीय लोगों के लिए खतरा बन चुकी है। खेतों में खड़ी फसलों का नुकसान तो हुआ ही, अब स्थिति और भयावह हो गई है। एक मासूम बच्चे की हाथी के हमले में मौत के बाद वन विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, हाथियों ने कई बार खेतों में घुसकर नुकसान पहुंचाया, चारदीवारियाँ तोड़ीं और रात के समय बस्तियों के करीब तक पहुँच गए। इस सबके बीच वन विभाग का दावा था कि वह ड्रोन से निगरानी, हवाई पेट्रोलिंग और जमीनी गश्त के ज़रिये हर मूवमेंट पर नजर रख रहा है। लेकिन 23 नवंबर की सुबह हुई घटना ने इन सभी दावों की सच्चाई उजागर कर दी।

रायवाला फ्लाईओवर के पास ओएनजीसी के एक आवासीय क्षेत्र में तैनात सफाई कर्मचारी के बच्चे पर हाथी ने अचानक हमला कर दिया। पास मौजूद लोग उसे बचा नहीं पाए, और बच्चा मौके पर ही दम तोड़ गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग से सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए।

वन विभाग की ‘हवाई नजर’ नाकाम क्यों रही?
वन विभाग का कहना था कि वह ड्रोन के जरिये हाथियों की गतिविधियां मॉनिटर कर रहा है, विशेषकर उन इलाकों में जहां गन्ने की अधिक खेती है और हाथियों का आना आम बात है। लेकिन घटना के समय न तो ड्रोन उपस्थित था और न ही किसी टीम की प्रभावी गश्त। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की चौकी बढ़ाने की बातें भी सिर्फ कागज़ों में सिमटी रहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ड्रोन सही समय पर उड़ रहा होता, तो हाथी की दिशा देखी जा सकती थी और आसपास के लोगों को अलर्ट किया जा सकता था। लेकिन विभाग का हवाई नजर रखना सिर्फ एक दावा साबित हुआ।

ग्रामीणों में भय और नाराजगी
डोईवाला और रायवाला क्षेत्र के कई परिवारों ने बताया कि हाथियों के डर से वे रात को जागते रहते हैं। खेतों में जानवरों के आने की आशंका के कारण किसान फसल की रखवाली खुद कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्थिति और अधिक जोखिम भरी है।

अब विभाग क्या कर रहा है?
घटना के बाद वन विभाग ने दावा किया है कि उसने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और टीमों को 24 घंटे अलर्ट रहने को कहा गया है। विभाग ने यह भी कहा कि ड्रोन गतिविधियां तेज की जाएँगी। लेकिन स्थानीय लोग इन दावों से आश्वस्त नहीं दिख रहे।

मासूम की मृत्यु ने यह साफ कर दिया है कि जमीन पर न होने वाली तैयारी, हवाई दावों से पूरी नहीं होती। जब तक वन विभाग ड्रोन, गश्त और अलर्ट सिस्टम को वास्तविक रूप से मजबूत नहीं करेगा, तब तक हाथियों की आवाजाही सिर्फ खेतों ही नहीं, जानें भी लीलती रहेगी। सवाल वही है, क्या अब भी दावे नहीं, वास्तविक सुरक्षा दिखेगी?

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

HillMail Magazine – September 2026

HillMail Sep 2026
पत्रिकाओं के सभी अंक देखें

Related Articles

भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए रामशरण नौटियाल, जुबिन नौटियाल के पिता हैं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष

उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को एक अहम घटनाक्रम सामने आया। देहरादून...

उत्तराखंड में अगले चार महीने में 2000 पदों पर भर्ती की तैयारी, UKSSSC का परीक्षा कैलेंडर जारी

उत्तराखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण...