13 साल की खामोशी के बाद हरीश राणा ने ली अंतिम सांस, अंगदान से दी नई जिंदगी

13 साल की खामोशी के बाद हरीश राणा ने ली अंतिम सांस, अंगदान से दी नई जिंदगी

इन 13 वर्षों में हरीश के परिवार ने कभी हार नहीं मानी। हर दिन, हर पल उन्हें यही उम्मीद रही कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। शायद हरीश एक दिन आंखें खोलें, कुछ बोलें, वापस लौट आएं।

गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा की जिंदगी 13 साल पहले एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। उस दुर्घटना ने उन्हें गहरे कोमा में पहुंचा दिया। एक ऐसी अवस्था, जहां न वे बोल सकते थे, न अपने आसपास की दुनिया को महसूस कर सकते थे।

उनका जीवन धीरे-धीरे मशीनों और अस्पताल की दीवारों तक सिमट गया। परिवार के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि एक लंबी परीक्षा थी। उम्मीद और हकीकत के बीच लगातार चलने वाली लड़ाई।

उम्मीद की लौ जो बुझी नहीं

इन 13 वर्षों में हरीश के परिवार ने कभी हार नहीं मानी। हर दिन, हर पल उन्हें यही उम्मीद रही कि शायद कोई चमत्कार हो जाए। शायद हरीश एक दिन आंखें खोलें, कुछ बोलें, वापस लौट आएं।

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों की टीम भी पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन उनकी हालत स्थिर ही बनी रही।

जब संघर्ष थम गया

4 मार्च को हरीश को आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक थी। 24 मार्च मंगलवार शाम 4:10 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

13 साल तक चली यह खामोशी आखिरकार खत्म हो गई, लेकिन पीछे छोड़ गई गहरी भावनाएं, यादें और एक अधूरी कहानी।

परिवार का साहसिक और प्रेरणादायक फैसला

हरीश के निधन के बाद उनके परिवार ने जो फैसला लिया, उसने इस दुखद घटना को एक नई दिशा दे दी। उन्होंने अंगदान का निर्णय लिया।

यह फैसला आसान नहीं था। किसी अपने को खोने के बाद भी दूसरों की जिंदगी के बारे में सोचना असाधारण साहस की बात है। डॉक्टरों के अनुसार, हरीश के अंग कई जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी देंगे।

जहां एक तरफ परिवार ने अपने बेटे को खो दिया, वहीं दूसरी तरफ कई परिवारों के घरों में उम्मीद की नई किरण जलेगी। अस्पताल प्रशासन ने इस निर्णय की सराहना की और इसे समाज के लिए एक मिसाल बताया।

समाज के लिए संदेश

यह कहानी हमें कई बातें सिखाती है, परिवार का धैर्य और समर्पण – 13 साल तक उम्मीद बनाए रखना, डॉक्टरों की लगातार कोशिशें, और सबसे अहम, अंगदान का महत्व। अंगदान सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है। यह किसी के जाने के बाद भी जीवन को आगे बढ़ाने का माध्यम है।

हरीश राणा अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका एक हिस्सा कई लोगों के जीवन में धड़कता रहेगा। उनकी कहानी यह बताती है कि “जीवन की सबसे बड़ी जीत, दूसरों को जीवन देने में है।”

Hill Mail
ADMINISTRATOR
PROFILE

विज्ञापन

[fvplayer id=”10″]

Latest Posts

Follow Us

Previous Next
Close
Test Caption
Test Description goes like this